मुंबई में 16 अक्टूबर तक BMC ने हटाए 52,448 बिना इजाज़त के बैनर, फ्लेक्स और पोस्टर
फ्लेक्स-फ्री मुंबई कैंपेन के तहत 1 जनवरी से 16 अक्टूबर के बीच BMC ने 52,448 बिना इजाज़त वाले बैनर, फ्लेक्स बोर्ड और पोस्टर हटाए।
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने फ्लेक्स-फ्री मुंबई कैंपेन के तहत 1 जनवरी से 16 अक्टूबर के बीच शहर से 52,448 बिना इजाज़त वाले बैनर, फ्लेक्स बोर्ड और पोस्टर हटाए हैं। यह कैंपेन अभी चल रहा है।
इतना बड़ा अभियान चलने के बावजूद लोगों का कहना है कि शहर भर में सड़कों, फुटपाथों और पब्लिक जगहों पर पॉलिटिकल बैनर, पार्टी के झंडे और प्रमोशनल डिस्प्ले अब भी दिख रहे हैं। दादर और शिवाजी पार्क से लेकर वर्ली, बांद्रा और दूसरे सबअर्बन इलाकों तक लोगों ने इस पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक ये डिस्प्ले पैदल चलने वालों की आवाजाही में रुकावट डालते हैं, खास जगहों को ढक लेते हैं और सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं। वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और बांद्रा ईस्ट में, खासकर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ऑफिस और चेतना कॉलेज के आसपास भी ऐसी ही शिकायतें आई हैं।
लोगों का कहना है कि सिविक अथॉरिटी जितनी तेज़ी से बिना इजाज़त वाले डिस्प्ले हटाती हैं, उतनी ही तेज़ी से नए बैनर लग जाते हैं। इससे कानून लागू करने के असर पर सवाल उठ रहे हैं।
8 से 16 अक्टूबर के बीच BMC ने एक स्पेशल एनफोर्समेंट ड्राइव चलाई। इसमें बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स बोर्ड और झंडों समेत 3,537 बिना इजाज़त वाले एडवर्टाइज़मेंट हटाए गए। एडवर्टाइज़िंग नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई है। BMC के लाइसेंसिंग डिपार्टमेंट की शिकायतों पर पुलिस स्टेशनों में चार FIR दर्ज हुई हैं। इसके अलावा BMC ने कथित तौर पर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में 333 दूसरे मामलों में भी शिकायतें दी हैं।
म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने कहा है कि यह कैंपेन साल के आखिर तक चलता रहेगा। इसका फोकस पब्लिक जगहों को खराब होने से रोकना और सिविक नियमों का पालन पक्का करना होगा।
बांद्रा ईस्ट के रहने वालों का कहना है कि उन्होंने अपने पड़ोस में बैनर और फ्लेक्स बोर्ड लगने से रोकने के लिए सीधे पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेटिव्स से बात करना शुरू कर दिया है। उनका मानना है कि पॉलिटिकल पार्टियों, इवेंट ऑर्गनाइज़र और कमर्शियल एडवरटाइज़र को ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए, ताकि बैनर सिर्फ़ ज़रूरी परमिशन के साथ ही लगें। लोग यह भी चाहते हैं कि पॉलिटिकल रैलियों, त्योहारों और पब्लिक इवेंट खत्म होने के बाद बैनर और प्रमोशनल मटीरियल तुरंत हटा दिया जाए।
मॉनिटरिंग बेहतर करने और परमिशन वाले एडवरटाइज़मेंट को गैर-कानूनी डिस्प्ले से अलग पहचानने के लिए BMC ऑथराइज़्ड बैनर और एडवरटाइज़िंग बोर्ड पर QR कोड ज़रूरी करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित सिस्टम से सिविक अधिकारी और आम लोग यह वेरिफ़ाई कर सकेंगे कि किसी डिस्प्ले को ज़रूरी मंज़ूरी मिली है या नहीं। लागू होने पर यह तरीका बिना इजाज़त वाले एडवरटाइज़मेंट की पहचान और उन पर कार्रवाई को ज़्यादा ट्रांसपेरेंट बना सकता है।
सिविक एडमिनिस्ट्रेशन ने अधिकारियों से कहा है कि पब्लिक की शिकायतों पर तुरंत जवाब दें और गैर-कानूनी डिस्प्ले हटाएं। भिड़े ने संबंधित डिपार्टमेंट को उन प्रिंटिंग प्रेस और एडवरटाइज़िंग एजेंसियों के खिलाफ़ कार्रवाई का निर्देश भी दिया है जो बिना ज़रूरी परमिशन के मटीरियल बनाती हैं। लाइसेंसिंग, मेंटेनेंस और अतिक्रमण हटाने वाले डिपार्टमेंट से उम्मीद है कि वे मिलकर काम करेंगे।
महाराष्ट्र प्रॉपर्टी डिफेसमेंट प्रिवेंशन एक्ट, 1995 पब्लिक प्रॉपर्टी को खराब करने वाले बिना इजाज़त के बैनर, पोस्टर और दूसरी चीज़ों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करता है। लागू नियमों के आधार पर नियम तोड़ने पर तीन महीने तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।
52,000 से ज़्यादा बैनर हटाना बड़ी एनफोर्समेंट कोशिश है। फिर भी लोगों का कहना है कि साफ़, सुरक्षित और सच में फ्लेक्स-फ्री शहर के लिए लगातार मॉनिटरिंग, बार-बार नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई और पॉलिटिकल पार्टियों व एडवरटाइज़र की ज़्यादा जवाबदेही ज़रूरी होगी।
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