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मुंबई लिटफेस्ट में क्रिकेट पर बहस: थरूर बोले, बीसीसीआई में हिसाब गिनने वालों का जोर

एनसीपीए में क्रिकेट किताबों पर हुई चर्चा भारत-पाकिस्तान क्रिकेट और बीसीसीआई की ताकत तक पहुंच गई।

मुंबई लिटफेस्ट में क्रिकेट पर बहस: थरूर बोले, बीसीसीआई में हिसाब गिनने वालों का जोर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

शनिवार को एनसीपीए में क्रिकेट की किताबों पर एक घंटे की बातचीत रखी गई थी, लेकिन बात किताबों के कवर से बहुत आगे निकल गई। जमशेद भाभा थिएटर में गोदरेज लिटरेचर लाइव! मुंबई लिटफेस्ट 2026 के इस सेशन में डॉ. शशि थरूर, लेखक राहुल भट्टाचार्य और पत्रकार अयाज मेमन मंच पर थे।

थरूर सिर्फ कांग्रेस के नेता नहीं हैं, क्रिकेट की भी अच्छी समझ रखते हैं। उन्होंने 2009 में पाकिस्तानी राजनयिक शहरयार खान के साथ मिलकर भारत-पाकिस्तान क्रिकेट पर "Shadows Across the Playing Field" नाम की किताब लिखी थी।

चर्चा में यह मुद्दा भी उठा कि भारत और पाकिस्तान 2007 के बाद से कोई द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज नहीं खेले हैं और वनडे क्रिकेट में 2013 के बाद से आमने-सामने नहीं आए। तीनों वक्ताओं ने बताया कि इससे क्रिकेट का कितना नुकसान हो रहा है।

बीसीसीआई की ताकत पर भी हर किसी की अपनी राय थी। मॉडरेटर अयाज मेमन ने कहा कि क्रिकेट को एक "कॉन्शियंस कीपर" की जरूरत है, और सवाल किया कि क्या भारत यह भूमिका निभाने के लिए आगे आने को तैयार है।

थरूर ने कहा, "हम कॉन्शियंस कीपर कम और हिसाब-किताब वाले, पैसे गिनने वाले लोगों के ज्यादा हवाले हैं।" उन्हें दिवंगत नेता अरुण जेटली की बात याद आई, जो कभी दिल्ली क्रिकेट के मुखिया रहकर क्रिकेट प्रशासन से गहराई से जुड़े थे। थरूर ने संयुक्त राष्ट्र में कई साल अलग-अलग पदों पर काम किया है। उन्हीं से जेटली ने कहा था, "मैं चाहता हूं कि आप समझें कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की भूमिका वैसी ही है जैसी सुरक्षा परिषद में अमेरिका की।"

मेमन ने याद दिलाया कि मंसूर अली खान पटौदी ने दिसंबर 2010 में कहा था कि बीसीसीआई क्रिकेट की आवाज बनने के बजाय क्रिकेट का इनवॉइस बन गया है। इसके बाद भट्टाचार्य ने कहा कि क्रिकेट में ताकत का बंटवारा बहुत टेढ़ा हो गया है। उनके शब्द थे, "यह केंद्रीकरण ठीक नहीं है।" उन्होंने जोड़ा कि दुनिया के क्रिकेट पर भारत का दबदबा उतना ही नापसंद करने लायक है, जितना पुराने दौर में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का रसूख था।

थरूर ने याद दिलाया कि भारत ने अब तक वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की ट्रॉफी नहीं जीती है। दुनिया भर की टी20 टीमें भारतीय मालिकों के हाथ में जा रही हैं, इस पर भट्टाचार्य ने कहा कि अब यह "एक विशाल आईपीएल" बन गया है।

शाम का विषय था "Lines at Length: Cricket books and why we love them", तो किताबों पर भी खूब बात हुई। वेस्ट इंडीज के लेखक सीएलआर जेम्स का जिक्र आया। इंग्लैंड के लेखक नेविल कार्डस का भी, जिनके बारे में कुछ किताबप्रेमी मानते हैं कि वे 22 गज के भीतर जो हुआ, उससे आगे जाकर बहुत बढ़ा-चढ़ाकर लिखते थे।

थरूर ने बताया कि उन्होंने कार्डस और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर से पत्रकार बने जैक फिंगलटन को थोड़ा पढ़ा है। खास किताबों में उन्होंने एजी मैकडोनेल का क्रिकेट से जुड़ा एक उपन्यास, रामचंद्र गुहा की "A Corner of a Foreign Field" और भट्टाचार्य की "Pundits from Pakistan" का नाम लिया, जो उन्होंने 2004 के पाकिस्तान दौरे पर लिखी थी।

भट्टाचार्य ने दिवंगत लेखकों पीटर रोबक की "It Never Rains" (1983 के इंग्लिश सीजन की डायरी) और माइक मार्कुसी की "Anyone But England" और "War Minus the Shooting" को अपनी पसंदीदा बताया। "War Minus the Shooting" उपमहाद्वीप में हुए 1996 वर्ल्ड कप पर है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई लेखक क्रिश्चियन रयान का खास जिक्र किया।

मेमन ने पटौदी की "Tiger's Tale", सुनील गावस्कर की "Sunny Days" और अंग्रेज लेखक स्काइल्ड बेरी की "Cricket Wallah" का नाम लिया, जो 1981-82 में इंग्लैंड के भारत दौरे का ब्योरा है। बेरी की किताब की थरूर और भट्टाचार्य ने भी तारीफ की। वक्ताओं का बस चलता तो वे क्रिकेट साहित्य पर बोलते ही रहते, लेकिन सबसे दिलचस्प आखिरी सेशन में भी स्टंप तो उखड़ने ही थे।

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