भायखला की 14 साल की उर्दू मीडियम छात्रा ने अंग्रेज़ी में लिखा अपना पहला फैंटेसी नॉवेल
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भायखला की एक 14 साल की छात्रा ने कभी अंग्रेज़ी मीडियम स्कूल में कदम नहीं रखा। फिर भी उसने अंग्रेज़ी में 100 पन्नों का फैंटेसी नॉवेल लिखकर छपवा लिया है।
मुंबई के ज़्यादातर मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे अंग्रेज़ी मीडियम स्कूल में पढ़ें, ताकि भाषा पर पकड़ बने। लेकिन भायखला की एक 14 साल की लड़की ने दिखा दिया है कि अंग्रेज़ी भी बाकी स्कूली विषयों की तरह सीखी जा सकती है। उसने कभी अंग्रेज़ी मीडियम स्कूल का मुंह नहीं देखा, फिर भी अंग्रेज़ी में अपना 100 पन्नों का फैंटेसी फिक्शन पेपरबैक छपवा लिया है।
लड़की के पिता कैब ड्राइवर हैं और मां घर संभालती हैं। वह घर में सबसे बड़ी है। उसके छोटे भाई-बहन प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हैं। वह खुद मदनपुरा, भायखला वेस्ट के Anjuman Khairul Islam Mohd Ali Mitha Girls High School में पढ़ती है। बचपन से अब तक वह सिर्फ उर्दू में पढ़ाने वाले स्कूलों में गई है। उसका मौजूदा स्कूल सेमी-इंग्लिश है, लेकिन उसने अपने सारे विषय उर्दू में ही पढ़ना चुना।
किताब का नाम Beneath A Lie है। कहानी एक काल्पनिक दुनिया में बसी है और दो बहनों के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें प्यार, परिवार और ड्रामा के पहलू भी हैं। किताब में 20 चैप्टर हैं। लड़की ने आठवीं क्लास में इसे लिखना शुरू किया था और पूरा करने में उसे दो साल लगे। पहले उसने इसे ऑनलाइन प्लैटफॉर्म पर डाला, जहां इसे सैकड़ों व्यू मिले। अब उसने इसे Kindle Direct Publishing के ज़रिए खुद छपवाया है। पेपरबैक की कुछ कॉपियां रास्ते में हैं।
स्कूल की प्रिंसिपल Qaisar Jahan Momin ने कहा, "शबीहत ने पूरी किताब कलम से कागज़ पर लिखी है, AI की मदद के बिना। पहले वह अपना काम सिर्फ ऑनलाइन डालती थी, अब उसने इसे पेपरबैक में खुद पब्लिश किया है और पहली कॉपियां जल्द पहुंचने वाली हैं। वह ऑनलाइन क्रिएटर कॉन्टेस्ट में भी हिस्सा ले चुकी है और जो भी साधन उसके पास हैं, उनका पूरा इस्तेमाल कर रही है।"
लड़की ने बताया कि अंग्रेज़ी उसने थोड़ी-बहुत अपनी मां से सीखी, जो कभी स्कूल में पढ़ाती थीं। उसके मुताबिक, "बचपन में मां मेरे लिए परियों की कहानियों की किताबें लाती थीं। फिर मैं अपनी लाइब्रेरी से फिक्शन की किताबें पढ़ने लगी। आखिर मैंने सोचा कि जब मुझे किताबें पढ़ना इतना पसंद है, तो मैं अपनी भी लिख सकती हूं।"
आजकल उसे ट्वाइलाइट जैसी पॉप-कल्चर हिट किताबों और लॉरेन रॉबर्ट्स जैसे यंग एडल्ट लेखकों से प्रेरणा मिलती है। वह जेन ऑस्टिन की किताबों और उन पर बनी फिल्मों के ज़रिए क्लासिक्स को भी समझने की कोशिश कर रही है।
लड़की की मां ने कहा, "मैंने खुद उर्दू मीडियम में पढ़ाई की है, इसलिए चाहती थी कि मेरी बेटी भी वैसे ही पढ़े। हमने यह इसलिए चुना कि इससे वह हमारी संस्कृति के करीब रहती है। फिर भी हम अपने फोन पर अंग्रेज़ी की एनिमेटेड फिल्में देखते हैं और किताबें व अखबार पढ़ते हैं, ताकि वह अंग्रेज़ी से भी जुड़ी रहे।"
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