आश्रय योजना के कार्यक्रम में नहीं बुलाए जाने पर मिलिंद देवरा ने BMC आयुक्त को लिखा पत्र
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शिवसेना के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवरा ने सरकारी कार्यक्रम में न्योता न मिलने पर नाराजगी जताई और बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिड़े को चिट्ठी लिखी।
शिवसेना के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवरा ने एक सरकारी कार्यक्रम में न बुलाए जाने पर नाराजगी जाहिर की है। यह कार्यक्रम शुक्रवार को दक्षिण मुंबई के कुलाबा में हुआ था। इसमें 'आश्रय' योजना के तहत सफाई कर्मचारियों को घर बांटे गए।
देवरा ने इस बारे में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की आयुक्त अश्विनी भिड़े को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने सवाल उठाया है कि कार्यक्रम से उन्हें बाहर क्यों रखा गया।
शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र गृहनिर्माण और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) के BDD चाल पुनर्विकास प्रोजेक्ट की तीन पुनर्वास इमारतों के 557 पात्र निवासियों को घरों की चाबियां सौंपीं। ये इमारतें प्रोजेक्ट के पहले चरण में बनी हैं और ना. म. जोशी मार्ग, लोअर परेल में हैं।
कार्यक्रम मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में हुआ। वहां मुख्यमंत्री फडणवीस और दूसरे गणमान्य लोगों ने प्रतीकात्मक तौर पर निवासियों को चाबियां और घरों का कब्जा दिया। पुनर्वास की ये तीन इमारतें ऐतिहासिक BDD चालों के पुनर्विकास में एक अहम पड़ाव मानी जा रही हैं।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद थे। इनके अलावा महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े, उपमहापौर संजय घाड़ी और महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे थे।
देवरा महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद हैं। इससे पहले वे दक्षिण मुंबई से दो बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें घर बांटने के इस कार्यक्रम का न्योता नहीं मिला।
अपनी चिट्ठी में सांसद ने लिखा कि सरकारी कार्यक्रमों में जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को उचित सम्मान और मान्यता मिलनी चाहिए। खासकर तब, जब कार्यक्रम उनके अपने चुनाव क्षेत्र के विकास प्रोजेक्ट से जुड़े हों। चुने हुए पद पर होते हुए भी निमंत्रण न मिलने पर देवरा ने हैरानी और नाराजगी जताई।
देवरा ने BMC आयुक्त से कहा है कि आगे सरकारी कार्यक्रमों में तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन हो, यह पक्का किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधिकारिक कार्यक्रमों में चुने हुए प्रतिनिधियों को पहचान देना जरूरी है। यह और भी जरूरी तब है, जब ऐसे आयोजन जनकल्याण और उनके चुनाव क्षेत्रों की विकास पहल से जुड़े हों।
इस चिट्ठी से मुंबई के सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल और चुने हुए नेताओं की मौजूदगी का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
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