आदित्य ठाकरे ने फडणवीस से मुंबई के समंदर में तैरते होर्डिंग रोकने को कहा
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शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखकर मुंबई के समुद्र में तैरते विज्ञापनों की इजाज़त पर रोक की मांग की है।
शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से दखल देने की मांग की है। मामला मुंबई के समुद्र में "फ्लोटिंग होर्डिंग" यानी तैरते होर्डिंग की इजाज़त का है। ठाकरे ने इस फैसले को बेहद गैरज़िम्मेदाराना बताया और कहा कि इससे शहर की खूबसूरती बिगड़ जाएगी।
ठाकरे ने फडणवीस को एक चिट्ठी लिखी है। गुरुवार को उन्होंने इस चिट्ठी की कॉपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की। चिट्ठी में उन्होंने कहा कि बेलगाम प्रदूषण है और उसे रोकने के लिए कोई गंभीर कार्रवाई नहीं हुई है। इसी वजह से शहर के ज़्यादातर हिस्सों से समुद्र मुश्किल से ही दिखता है, थोड़ी दूरी से भी नहीं।
ठाकरे ने लिखा, "अफसोस की बात है कि होर्डिंग ठेकेदारों के एक कार्टेल का साथ देने वाले इस बेतुके फैसले के बाद जो कुछ भी दिखेगा, वह नागरिकों के चेहरे पर चिपकाए गए विज्ञापन ही होंगे, उन नागरिकों के चेहरे पर, जो पहले से ही ज़मीन पर फैले बेलगाम प्रदूषण की मार झेल रहे हैं।"
इस फैसले के पीछे मुंबई मैरीटाइम बोर्ड है। बोर्ड ने शहर के मशहूर वॉटरफ्रंट के पास बार्ज यानी बड़ी नावों पर तैरते विज्ञापन लगाने की इजाज़त देने का फैसला किया है।
इस कदम की आलोचना करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि शहर में होर्डिंग को लेकर एक नीति होनी चाहिए। उनके मुताबिक यह नीति रात में नागरिकों को परेशान करने वाले LED होर्डिंग पर नियंत्रण रखे और पूरे शहर में होर्डिंग की गिनती भी सीमित करे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्टेल के ऊपर खूबसूरती को तरजीह मिलनी चाहिए, यही कायदा होना चाहिए। मगर अफसोस, इस फैसले में खूबसूरती के बजाय ठेकेदारों को चुना गया है।
वर्ली से शिवसेना (UBT) के विधायक ठाकरे ने चिट्ठी में मुख्यमंत्री से आग्रह किया, "मैं आपसे दखल देने और इस फैसले को रोकने की गुज़ारिश करता हूं, जो बेहद गैरज़िम्मेदाराना है, मुमकिन है भ्रष्ट भी हो, और यकीनन मुंबई की खूबसूरती बिगाड़ने वाला है।"
इससे पहले 24 अक्टूबर को भी ठाकरे ने मुख्यमंत्री फडणवीस को चिट्ठी लिखी थी। वह चिट्ठी ठाणे के एक रिहायशी इलाके में प्रस्तावित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर को लेकर थी। उसमें उन्होंने चिंताएं उठाईं और सवाल किया कि इस सुविधा को वहीं बनाने का फैसला क्यों हुआ।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ठाकरे ने कहा कि यह प्रोजेक्ट ठाणे के लोगों पर थोपा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सुविधा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने के बावजूद नागरिकों की कई चिंताओं का जवाब नहीं मिला है।
शिवसेना (UBT) नेता ने यह भी बताया कि एक प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने एक कमेटी बनाई थी, जिसमें वे खुद शामिल हुए थे। हालांकि उन्होंने कमेटी की बनावट पर सवाल उठाया। उनका दावा था कि कमेटी के प्रमुख को छोड़कर लगभग सभी सदस्य प्रशासन के पदेन सदस्य हैं।
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