ठाणे में रिहायशी इलाके के AI डेटा सेंटर पर आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री फडणवीस को चिट्ठी लिखी
आदित्य ठाकरे ने ठाणे के रिहायशी इलाके में प्रस्तावित AI डेटा सेंटर पर मुख्यमंत्री फडणवीस को चिट्ठी लिखकर जगह पर सवाल उठाए हैं।
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वरली से शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखी है। यह चिट्ठी ठाणे के एक रिहायशी इलाके में प्रस्तावित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर को लेकर है। ठाकरे ने सवाल उठाया है कि यह सेंटर आखिर वहीं क्यों लगाया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर डाली गई एक पोस्ट में ठाकरे ने कहा कि यह प्रोजेक्ट ठाणे के लोगों पर थोपा गया है। उनका आरोप है कि इस सेंटर के खिलाफ प्रदर्शन हुए, फिर भी नागरिकों ने जो सवाल उठाए, उनमें से कई के जवाब अब तक नहीं मिले।
ठाकरे ने बताया कि जिस प्रदर्शन में वे खुद शामिल हुए थे, उसके बाद राज्य सरकार ने एक कमेटी बनाई। लेकिन उन्होंने इस कमेटी की बनावट पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि कमेटी के मुखिया को छोड़ दें तो लगभग सभी सदस्य प्रशासन के पदेन सदस्य हैं।
ठाकरे ने लिखा, "मैं जिस नागरिक प्रदर्शन में शामिल हुआ था, उसके बाद सरकार ने एक कमेटी बनाई है, लेकिन उसमें मुखिया को छोड़कर लगभग सभी प्रशासन के पदेन सदस्य हैं।"
शिवसेना (UBT) नेता ने प्रस्तावित डेटा सेंटर की बिजली खपत, शोर के प्रदूषण, गर्मी के उत्सर्जन और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं की तरफ ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि वहां के लोग सेंटर की जगह पर सवाल उठा रहे हैं और नहीं चाहते कि रिहायशी बस्ती के बीचोबीच AI डेटा सेंटर बने।
मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी में ठाकरे ने पूछा कि यह सुविधा महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) के तहत तय औद्योगिक इलाके में क्यों नहीं ले जाई जा सकती। उन्होंने लिखा, "बिजली खपत, शोर के प्रदूषण, गर्मी निकलने और सुरक्षा को लेकर कई सवाल बाकी हैं। नागरिक जगह पर सवाल उठा रहे हैं और रिहायशी इलाके के बीच AI डेटा सेंटर बिलकुल नहीं चाहते।"
ठाकरे ने उस नीति पर भी साफ जवाब मांगा है, जिसके तहत डेवलपर को यह डेटा सेंटर प्रस्तावित जगह पर लाने की इजाजत मिली। उन्होंने पूछा कि किन परमिशन और किन प्लानिंग फैसलों की वजह से रिहायशी इलाके में यह प्रोजेक्ट खड़ा हो पाया।
लोगों की आपत्तियों पर सरकार के रुख को लेकर ठाकरे ने पूछा कि प्रशासन नागरिकों की चिंताओं पर गौर करेगा या बिल्डरों के हितों को आगे रखेगा। अपनी पोस्ट में उन्होंने सवाल किया, "क्या सरकार सिर्फ बिल्डरों की सुनेगी? क्या बिल्डरों के फायदे के लिए सरकार नागरिकों को नजरअंदाज करेगी?"
प्रस्तावित डेटा सेंटर का आसपास के लोग विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि इसका असर पूरे मोहल्ले पर पड़ेगा। ठाकरे की आपत्तियां मुख्य रूप से जगह के सही होने और सेंटर के पर्यावरण और सुरक्षा पर पड़ने वाले असर के बारे में ज्यादा साफ जानकारी देने की जरूरत पर टिकी हैं।
AI के ढांचे को चलाने वाले डेटा सेंटरों को काफी बिजली और कूलिंग की क्षमता चाहिए होती है। उनके डिजाइन और कामकाज के हिसाब से उनसे मशीनों का शोर भी हो सकता है और गर्मी भी निकल सकती है। इसी वजह से लोगों की चिंताओं ने सवाल खड़ा किया है कि ऐसी सुविधाओं की जरूरतें क्या हैं और क्या वे घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों के साथ मेल खाती हैं।
ठाकरे की चिट्ठी में मांग की गई है कि राज्य सरकार इन मुद्दों को सुलझाने के लिए दखल दे और प्रोजेक्ट की जगह पर दोबारा विचार करे।
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