27 घर टूटने पर गोपाल शेट्टी ने मुंडवाया सिर, बीएमसी और भाजपा नेताओं पर साधा निशाना
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पूर्व भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी ने बोरीवली ईस्ट में बीएमसी की तोड़फोड़ के विरोध में सिर मुंडवाया। उनका कहना है कि परिवारों को सामान निकालने का वक्त नहीं मिला और पार्टी के स्थानीय नेता साथ नहीं आए।
पूर्व भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी ने बोरीवली ईस्ट में 27 घर तोड़े जाने के विरोध में अपना सिर मुंडवा लिया। उनका आरोप है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने जल्दबाज़ी में कार्रवाई की और रहने वालों को अपना सामान निकालने के लिए पूरा वक्त नहीं दिया।
शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए शेट्टी ने कहा कि उन्होंने बेघर हुए परिवारों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए सिर मुंडवाया है। 4 नवंबर को हुई इस कार्रवाई को उन्होंने "लोकतंत्र का मज़ाक" बताया। उन्होंने स्थानीय भाजपा नेतृत्व पर भी आरोप लगाया कि उसने प्रभावित परिवारों का साथ नहीं दिया।
बीएमसी ने बोरीवली ईस्ट में स्वामी विवेकानंद रोड पर 3,400 वर्ग मीटर के उस प्लॉट पर बने 27 घर गिराए, जो बेस्ट के बस स्टेशन के लिए आरक्षित है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हुई। कोर्ट ने पहले के निर्देशों के बावजूद अतिक्रमण न हटाने पर महानगरपालिका की खिंचाई की थी।
शेट्टी ने कहा, "मैंने अपने सार्वजनिक जीवन में ऐसी कार्रवाई कभी नहीं देखी। अजमल कसाब जैसे आदमी को भी, जिसने 26/11 का आतंकी हमला किया था, मुकदमे का सामना करने के लिए आठ साल मिले और दोषी ठहराए जाने के बाद राष्ट्रपति के पास जाने का मौका भी मिला।"
उनके मुताबिक रहने वालों को 4 नवंबर को रात करीब 1.30 बजे नोटिस मिले और सुबह 7 बजे तक उनके घर तोड़ दिए गए। यानी अपना सामान निकालने के लिए उनके पास बहुत कम वक्त था।
पूर्व सांसद ने यह सवाल भी उठाया कि बीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट में मामला किस तरह रखा। उनका आरोप है कि कोर्ट ने संबंधित कागज़ात मांगे थे, फिर भी महानगरपालिका ने रहने वालों को जारी किए गए नोटिस और उनके जवाबों की कॉपी जमा नहीं की।
शेट्टी का दावा है कि प्रभावित परिवार करीब 50 साल से इस ज़मीन पर रह रहे थे और उनके पास संपत्ति कर के बिल थे। उन्होंने इस प्लॉट को निजी ज़मीन बताया और आरोप लगाया कि कोर्ट के सामने गलत जानकारी रखी गई। उन्होंने न्यायपालिका से अपील की कि वह इस मामले में शामिल अफसरों के आचरण की जांच करे।
सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाते हुए नगर आयुक्त अश्विनी भिड़े और संबंधित अफसरों के नवंबर के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया था। साथ ही अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की थी। बाद में बीएमसी ने कोर्ट को बताया कि ढांचे हटा दिए गए हैं, जिसके बाद वेतन से जुड़ा निर्देश और अवमानना का नोटिस वापस ले लिए गए।
विवाद के बाद महानगरपालिका ने आर-सेंट्रल वार्ड के सहायक आयुक्त प्रफुल्ल तांबे और विधि अधिकारी कोमल पंजाबी को प्रशासनिक चूक के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किए। उसने अपने विधि विभाग का प्रभार भी किसी और को सौंप दिया।
नगर प्रशासन के साथ शेट्टी ने अपनी पार्टी के स्थानीय नेतृत्व से भी खुलकर नाराज़गी जताई। उनका आरोप है कि उत्तर मुंबई के भाजपा नेता न तो प्रभावित परिवारों से मिलने गए और न आंदोलन में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा, "मैं अपनी पार्टी से यकीनन नाराज़ हूं। मैं यह छुपाऊंगा नहीं। मैंने पार्टी को खड़ा करने के लिए दिन-रात मेहनत की है, और अगर अब कुछ लोग खुद को उसका मालिक समझने लगे हैं तो यह ठीक नहीं है।"
शेट्टी ने ऐलान किया कि वे भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों से दूर रहेंगे, जिनमें मुंबई इकाई का सालाना दिवाली मिलन भी शामिल है। हालांकि उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यक्रमों में वे जाते रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वे इस मुद्दे को दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के सामने उठाने की योजना बना रहे हैं।


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