शनिवार, 7 नवंबर 2026

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बीएमसी का 'पार्टिसिपेट मुंबई' पोर्टल लॉन्च के एक महीने बाद भी वॉलंटियर्स के लिए खाली

बीएमसी का 'पार्टिसिपेट मुंबई' पोर्टल लॉन्च के एक महीने बाद भी वॉलंटियर्स के लिए खाली तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 6 अक्टूबर 2026 को पोर्टल शुरू किया था, लेकिन उस पर अब तक वॉलंटियर बनने का एक भी मौका नहीं डाला गया है।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का 'पार्टिसिपेट मुंबई' पोर्टल शुरू हुए एक महीना हो चुका है, मगर उस पर वॉलंटियर के तौर पर जुड़ने का एक भी मौका अब तक नहीं दिखता। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे 6 अक्टूबर 2026 को औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। इस प्लेटफॉर्म का मकसद आम नागरिकों, कॉरपोरेट कंपनियों और संगठनों को जोड़ना है, ताकि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के संसाधन और वॉलंटियर की मेहनत मुंबई के टिकाऊ विकास में लगाई जा सके।

पोर्टल पर वॉलंटियर के लिए सात श्रेणियां रखी गई हैं: स्वास्थ्य, सामुदायिक सेवा, शिक्षा, पर्यावरण, आपदा राहत, गार्डन और पार्क, और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट। ये सब "वॉलंटियर इनिशिएटिव्स कमिंग सून" यानी जल्द आने वाली पहल के नीचे दर्ज हैं, और किसी भी श्रेणी में फिलहाल कोई मौका पोस्ट नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि नागरिक भागीदारी वाले हिस्से में, जहां करीब 500 वॉलंटियर दर्ज हैं, महीने के आखिर तक मौके आ जाने चाहिए।

पोर्टल के वॉलंटियर पेज पर लिखा है, "हजारों नागरिकों से जुड़िए जो असली बदलाव ला रहे हैं, बीच की सफाई और पेड़ लगाने से लेकर हेल्थ कैंप और शिक्षा कार्यक्रमों तक।" 'पार्टिसिपेट मुंबई' के मिशन के बारे में लिखा है कि मकसद CSR संसाधनों को मुंबई की सबसे जरूरी विकास चुनौतियों की तरफ भेजने के लिए एक व्यवस्थित, पारदर्शी और कारगर तरीका बनाना है।

CSR की तरफ तस्वीर कुछ अलग है। फिलहाल 246 प्रोजेक्ट लाइव हैं और लगभग 40 करोड़ रुपये के CSR प्रस्ताव मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा response सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्रोजेक्ट्स को मिला है, उसके बाद शिक्षा को। एक नागरिक अधिकारी ने कहा, "हम संगठनों से गुजारिश करेंगे कि वे हमारे स्वास्थ्य से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी हिस्सा लें।"

जब पूछा गया कि लॉन्च के वक्त बीएमसी ने जो "करीब 500" रजिस्टर्ड वॉलंटियर बताए थे, वे अब मौके न होने पर क्या कर रहे हैं, तो एक अधिकारी ने कहा, "वॉलंटियर हमारे पास रजिस्टर्ड हैं। जैसे ही हम मौके लॉन्च करेंगे, इसी पूल से लोगों को हिस्सेदारी का ऑफर देंगे।" यह पूछे जाने पर कि क्या पिछले एक महीने में रजिस्टर्ड वॉलंटियर की संख्या बढ़ी है, अधिकारी ने कहा, "नहीं, हमारा फोकस पहले कार्यक्रम शुरू करने पर है। उसके बाद स्टूडेंट्स और सीनियर सिटिजन तक पहुंच बनाकर और वॉलंटियर जोड़ने पर ध्यान देंगे।"

नागरिकों से अब तक कितने वॉलंटियरिंग आइडिया आए, इस सवाल पर अधिकारी ने कहा, "अब तक हमें पंद्रह आइडिया मिले हैं और उन पर विचार की प्रक्रिया जारी है। नागरिक अपने आइडिया पोर्टल के जरिए दे सकते हैं और बीएमसी उनकी लिस्टिंग प्रोसेस करेगी। इस महीने के आखिर तक कई मौके लिस्ट किए जाएंगे।"

मलाड के गुरुद्वारे से जुड़े 59 साल के तेजिंदरपाल सिंह खाने के वितरण के वॉलंटियर हैं। उन्होंने कहा, "हम अपने गुरुद्वारे में और अलग-अलग जगहों पर नियमित लंगर सेवा करते हैं। लेकिन कई बार लेने वाला कोई नहीं मिलता और बना हुआ खाना ज्यादा देर टिकता नहीं। अगर 'पार्टिसिपेट मुंबई' खाना बांटने के रियल-टाइम मौके दे, तो हमारे काम आएगा। टेक्नोलॉजी से हमारी सेवा आसान होगी और खाने की बर्बादी भी घटेगी।"

22 साल की ग्रेस हरजस साइकोलॉजी की स्टूडेंट हैं और मेंटल हेल्थ काउंसलिंग की वॉलंटियर हैं। उन्होंने कहा, "मैंने स्टूडेंट्स के लिए एजुकेशन और करियर काउंसलिंग की है, हेल्थ कैंप में परिवार और रिश्तों की काउंसलिंग की है, और साइकोएजुकेशन के जागरूकता अभियानों में भी काम किया है। ऐसे मौके अपने आप मिलना मुश्किल है और ज्यादातर हमें अनुभव के लिए आयोजकों को पैसे देने पड़ते हैं। मुंबई भर के बहुत से साइकोलॉजी स्टूडेंट्स इस पोर्टल से जरूरतमंदों की और अपनी भी मदद कर सकते हैं।"

वॉलंटियर धर्मेश बराई ने कहा, "हम वॉलंटियरिंग में जमा हुआ ग्रुप हैं और पिछले पांच साल से हर वीकेंड सफाई कार्यक्रम करते आ रहे हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र में 324 कार्यक्रमों में करीब 1.5 लाख वॉलंटियर शामिल हुए हैं और समुद्र किनारे से 1300 टन कचरा हटाया गया है। फिर भी हमें इस पोर्टल की जानकारी नहीं है। अगर बीएमसी को पोर्टल पर डालने के लिए वॉलंटियरिंग के मौके चाहिए, तो हम जैसे अनुभवी ग्रुप्स से संपर्क क्यों न करे?"

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