फडणवीस सरकार का किसानों को राहत भरा फैसला, जमीन के रिकॉर्ड की जांच के बाद मिलेगा फार्मर आईडी
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एग्रीस्टैक के तहत छूटे किसानों को फार्मर आईडी देने के लिए राजस्व विभाग ने नई कार्यप्रणाली का परिपत्र जारी किया है।
महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार ने एग्रीस्टैक के तहत सभी किसानों को फार्मर आईडी देने की पहल की है। जमीन का रिकॉर्ड या खेती की जानकारी न होने से कुछ किसान अब तक इस आईडी से वंचित हैं। उन्हें राहत देने के लिए सरकार ने फैसला लिया है।
महायुति सरकार के फैसले के बाद तलाठी, मंडल अधिकारी और तहसीलदार की रिकॉर्ड जांच के बाद छूटे किसानों को फार्मर आईडी मिलने का रास्ता खुल गया है। सरकारी योजनाओं का लाभ, अनुदान, फसल कर्ज, फसल बीमा और डिजिटल कृषि सेवाएं सभी किसानों तक पहुंचाने की कोशिश चल रही थी। इसी के तहत राजस्व विभाग ने नई कार्यप्रणाली का परिपत्र जारी किया है। एग्रीस्टैक के इस्तेमाल के दौरान कुछ अपवाद वाले मामलों में फार्मर आईडी जारी करने का फैसला हुआ है।
जो किसान 1 जनवरी 2015 से पहले खेती कर रहे थे, आज भी वह खेती उनके कब्जे में है और उनके पास इसका कम से कम एक सबूत है, उन्हें फार्मर आईडी मिलेगी। करार पर खेती करने वाले लोग, सरकार से जमीन आवंटित पात्र लोग और शासनादेश में बताए दूसरे समान अपवाद वाले मामलों के किसान भी इसमें आएंगे।
जांच तलाठी, मंडल अधिकारी और तहसीलदार, इन तीन स्तर पर होगी, उसके बाद आईडी जारी होंगे। तलाठी सिस्टम में जानकारी दर्ज करने से पहले गांव के उपलब्ध पुराने और अद्यतन राजस्व रिकॉर्ड, जमीन राजस्व की रसीदें, इनाम रजिस्टर, सनद, किराया पट्टा या करारनामा और जमीन मंजूरी आदेश जांचेगा। अधिकृत रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल करनी होगी।
जांच के आधार वाले रिकॉर्ड की कॉपियां सिस्टम में अपलोड करनी होंगी और तलाठी को किसानों की सूची चौपाल पर प्रकाशित करनी होगी। इसके बाद मंडल अधिकारी पड़ताल और जांच करेगा। फिर तहसीलदार तलाठी और मंडल अधिकारी के मंजूर किए कागजात की छानबीन करेगा। तहसीलदार की मंजूरी मिलने के बाद किसान के खेत के हिस्से का फार्मर आईडी दिया जाएगा।
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