मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:31 IST

यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच रूस में चुनाव, पुतिन की पार्टी को 56 फीसदी वोटिंग के साथ बड़ी बढ़त

रूस में तीन दिन चली संसदीय वोटिंग के आखिरी दिन यूक्रेन ने अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया, तीन लोगों की मौत हुई। इसके बावजूद पुतिन की यूनाइटेड रशिया पार्टी को शुरुआती नतीजों में भारी बढ़त मिली है।

यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच रूस में चुनाव, पुतिन की पार्टी को 56 फीसदी वोटिंग के साथ बड़ी बढ़त
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

यूक्रेन के खिलाफ पूरी ताकत से जंग छिड़ने के बाद रूस में जो पहला संसदीय चुनाव हुआ, उसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया ने वही किया जिसकी उम्मीद थी - अपना दबदबा फिर से साबित कर दिया। 18 से 20 सितंबर तक, यानी पूरे तीन दिन चली इस वोटिंग में माहौल बेहद तनावभरा रहा, फिर भी 56.66 फीसदी वोटरों ने अपना वोट डाला। रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग की तरफ से जारी शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अब तक 58 फीसदी से ज्यादा पोलिंग स्टेशनों पर गिनती पूरी हो चुकी है, और पार्टी-सूची वाली सीटों पर यूनाइटेड रशिया को करीब 58 फीसदी वोट मिले हैं। ज्यादातर सिंगल-मेंबर सीटों पर भी पुतिन की पार्टी के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं।

यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा था क्योंकि इसी से 450 सीटों वाली रूसी संसद के निचले सदन "स्टेट ड्यूमा" पर पकड़ तय होनी थी। क्रेमलिन ने इस मौके का पूरा इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया कि यूक्रेन जंग को लेकर लिए गए फैसले को रूसी जनता का पूरा समर्थन हासिल है। याद रहे, इससे पहले 2021 के चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 324 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी, और शुरुआती नतीजे बता रहे हैं कि इस बार भी पार्टी ने अपना यही दबदबा बरकरार रखा है।

यह वोटिंग सिर्फ राजनीतिक दांव-पेच तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने जंग के मैदान जैसा रूप ले लिया। वोटिंग के आखिरी दिन यानी रविवार को यूक्रेनी सेना ने रूसी सीमा में अब तक का सबसे बड़ा और भीषण ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसने रूसी हवाई क्षेत्र में 1,110 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। मॉस्को के मेयर सर्गी सोब्यानिन ने कहा था कि उन्होंने 1,600 से ज्यादा ड्रोन रोके, लेकिन इन हमलों में मॉस्को इलाके में तीन लोगों की जान चली गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन हमलों की वजह से मॉस्को के पास एक तेल रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा और कई इलाकों में आग लगने की घटनाएं हुईं। सुरक्षा के लिहाज से काला सागर किनारे बसे टूरिस्ट शहर सोची के कई पोलिंग स्टेशन कुछ घंटों के लिए बंद करने पड़े।

रूस के करीब 11 करोड़ पात्र वोटरों के लिए ऑनलाइन डिजिटल रिमोट वोटिंग की सुविधा भी बड़े पैमाने पर दी गई थी। खुद राष्ट्रपति पुतिन, प्रधानमंत्री मिखाईल मिशुस्टिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ऑनलाइन तरीके से ही वोट डाला। लेकिन चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को समेत कई इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर साइबर हमले की खबरें भी आईं। स्वतंत्र न्यूज एजेंसियों का आरोप है कि कई पोलिंग स्टेशनों पर तकनीकी खराबी की वजह से वोटरों को कागजी मतपत्र नहीं दिए गए और जबरन इलेक्ट्रॉनिक टर्मिनल पर भेजा गया। रूस ने यूक्रेन के डोनेत्स्क, लुहान्स्क, जापोरिझिया और खेरसॉन इलाकों के साथ-साथ 2014 में कब्जाए गए क्रीमिया में भी वोटिंग कराई, जिसे यूक्रेन, यूरोपियन यूनियन और संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।

इस चुनाव में यूनाइटेड रशिया के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ द रशियन फेडरेशन, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी, अ जस्ट रशिया और न्यू पीपल जैसी पार्टियां भी मैदान में थीं, लेकिन ये सभी नाम की ही विपक्षी पार्टियां हैं और संसद में क्रेमलिन की हर बड़ी नीति का समर्थन करती हैं। रूस की इकलौती बड़ी और आधिकारिक तौर पर युद्ध-विरोधी पार्टी याब्लोको को रूस के सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में ही राष्ट्रीय पार्टियों की लिस्ट से बाहर कर दिया था। एलेक्सी नवलनी जैसे कई युद्ध-विरोधी नेताओं को जेल भेजा गया, चुनाव लड़ने से रोका गया या देश छोड़ने पर मजबूर किया गया। कम्युनिस्ट पार्टी और याब्लोको के प्रतिनिधियों ने शिकायत की है कि कई जगहों पर उनके चुनाव पर्यवेक्षकों को पोलिंग स्टेशन में घुसने ही नहीं दिया गया। इस पूरे दमन के बीच अब दुनिया भर में यह सवाल उठ रहा है कि रूस का यह संसदीय चुनाव आखिर कितना निष्पक्ष रहा।

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