व्हॉट्सऐप में आ रहा रिस्ट्रिक्टेड चैट, एक्सपोर्ट और लिंक्ड डिवाइस पर लगेगी रोक
मेटा का मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हॉट्सऐप एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है। इससे चैट एक्सपोर्ट, मेटा एआई और मीडिया ऑटो डाउनलोड पर रोक लगाई जा सकेगी।
मेटा का इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हॉट्सऐप यूजर्स का अनुभव बेहतर करने के लिए लगातार नए फीचर लाता रहता है। अब कंपनी एक और ऐसे फीचर की टेस्टिंग कर रही है। इसके जरिए यूजर्स चैट एक्सपोर्ट, मेटा एआई के इस्तेमाल और मीडिया ऑटो डाउनलोड पर रोक लगा सकेंगे। इसके अलावा यूजर्स लिंक्ड डिवाइस पर अपनी चैट का एक्सेस भी ब्लॉक कर पाएंगे।
WABetaInfo की एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी अपने पुराने एडवांस चैट प्रायवेसी फीचर का नाम बदलने की तैयारी में है। अब यह फीचर रिस्ट्रिक्टेड चैट के नाम से उपलब्ध कराया जा सकता है। इसमें प्राइमरी डिवाइस की लिमिटेशन भी जोड़ी जा रही है। बताया जा रहा है कि यूजर्स के मन में जो उलझन थी, उसे दूर करने के लिए कंपनी ने नाम बदलने का फैसला किया है। यह बदलाव फिलहाल कुछ चुनिंदा बीटा यूजर्स के लिए रोलआउट किया गया है।
यह फीचर चैट इन्फो स्क्रीन पर दिखाई दे सकता है। किसी एक व्यक्ति के साथ की चैट पर यह चार तरह की रोक लगाएगा। चैट करने वाला सामने वाला शख्स अपने फोन में चैट का मीडिया अपने आप सेव नहीं कर पाएगा। उसके लिए चैट एक्सपोर्ट करने का ऑप्शन भी रोका जा सकता है। साथ ही सामने वाला चैट के दौरान मेटा एआई का इस्तेमाल भी नहीं कर सकेगा।
सबसे अहम बात यह है कि संबंधित यूजर आपकी चैट्स को एक्सेस करने के लिए लिंक्ड डिवाइस, जैसे व्हॉट्सऐप वेब या टैबलेट, का इस्तेमाल भी नहीं कर पाएगा। WABetaInfo की दी हुई जानकारी के अनुसार यूजर्स को बातचीत एक्सेस करने के लिए अनधिकृत क्लाइंट्स या एआई एजेंट्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऑप्शन भी मिलेगा।
कुछ अनधिकृत टूल्स ऐसे हैं जो आम तौर पर बातचीत एक्सेस करने के लिए लिंक्ड डिवाइस पर निर्भर रहते हैं। कंपनी जब यह फीचर चालू करेगी, उसके बाद चैट के मैसेज दोनों यूजर्स के प्राइमरी डिवाइस तक ही सीमित रहेंगे।
इसी बीच यह जानकारी भी सामने आई है कि प्लेटफॉर्म बॉटम नेविगेशन बार के लिए एक नए और सादे लुक पर भी काम कर रहा है। इसमें टेक्स्ट लेबल नहीं होंगे, जिससे यह आईफ़ोन जैसा दिख सकता है। इसके अलावा कंपनी ने हाल ही में प्लेटफॉर्म पर टीनएज बच्चों के अकाउंट के लिए पैरेंटल कंट्रोल्स पेश किए हैं। इनसे बच्चों की सुरक्षा की गारंटी मिलती है और एक्सेस पर सीमा लगती है, ताकि वे सुरक्षित माहौल में प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर सकें।