वाई नगरपरिषद की स्कूल नंबर 1 की इमारत में लिफ्ट का काम अधूरा, निष्पक्ष जांच की मांग
करोड़ों रुपये की लागत से बनी वाई नगरपरिषद की स्कूल नंबर 1 की इमारत में लिफ्ट के नीचे का काम पूरा न होने पर नागरिकों ने ठेकेदार के काम की जांच मांगी है।
वाई नगरपरिषद की स्कूल नंबर 1 की इमारत करोड़ों रुपये खर्च करके बनाई गई थी। इमारत को पूरा हुए तीन से चार साल हो चुके हैं। इसके बावजूद वहां की बुनियादी सुविधाओं का हाल देखकर नगरपालिका के कामकाज पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उद्घाटन के वक्त बड़े जोर-शोर से कहा गया था कि इमारत में सारी सुविधाएं मौजूद हैं। अब आरोप लग रहा है कि लिफ्ट जैसी अहम सुविधा के काम में ही गंभीर खामियां हैं।
स्कूल की इमारत में लिफ्ट लगा दी गई है, लेकिन नागरिकों के मुताबिक लिफ्ट के नीचे जरूरी बांधकाम और पीसीसी का काम किया ही नहीं गया है। इस पर लोग गुस्से में पूछ रहे हैं कि लाखों रुपये खर्च करके लगाई गई यह सुविधा क्या सिर्फ नाम की रह गई है। उनका कहना है कि एक तरफ बच्चों की सुरक्षा और सहूलियत के नाम पर करोड़ों रुपये का फंड खर्च होता है, और दूसरी तरफ उसी इमारत के जरूरी काम अधूरे या घटिया तरीके से पड़े रहते हैं। ऐसे में सवाल है कि पालिका प्रशासन आखिर किसके हित की फिक्र कर रहा है, विद्यार्थियों की या ठेकेदारों की।
इमारत पूरी हुए कई साल बीत चुके हैं, फिर भी संबंधित प्रशासन ने इन खामियों को दूर करने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए, इसका जवाब नागरिकों को मिलना चाहिए। लोगों का यह भी कहना है कि इसकी गहराई से जांच हो कि ठेकेदार ने काम सच में पूरा किया या सिर्फ कागजों में पूरा दिखा दिया।
गार्डन को लेकर भी शिकायत है। स्कूल के प्रांगण में गार्डन के लिए जगह रखी गई है, मगर आज तक वहां उम्मीद के मुताबिक फूलों के पौधे, हरियाली या सजावट नहीं की गई। नागरिकों की मांग है कि बच्चों को साफ, सुंदर और खुशनुमा पढ़ाई का माहौल देने के लिए जो इंतजाम किया गया था, उसका पैसा कहां इस्तेमाल हुआ, इसका हिसाब सामने आए। पालक और नागरिक पूछ रहे हैं कि इमारत तो खड़ी हो गई, पर सुविधाएं कहां हैं।
इस इलाके की नुमाइंदगी करने वाले मौजूदा नगरसेवकों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने अब तक इस गंभीर मामले पर ध्यान क्यों नहीं दिया। बच्चे रोज इस इमारत में आते-जाते हैं। ऐसे में लिफ्ट जैसी सुविधा अधूरी हो, तो मौके पर जाकर देखना और प्रशासन से जवाब मांगना क्या जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी नहीं है, यह भी नागरिक पूछ रहे हैं।
पूरे निर्माण की तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक स्तर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। मांग है कि काम का अंदाजपत्रक, मंजूर नक्शा, असल में किया गया काम, इस्तेमाल हुआ सामान, मेजरमेंट बुक, भुगतान और काम की क्वालिटी, सब की जांच की जाए। नागरिकों का कहना है कि किसी का भी राजनीतिक हित हो, उसे अलग रखकर जांच होनी चाहिए। गड़बड़ी मिले तो ठेकेदार के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई हो।
नागरिकों के मुताबिक करोड़ों के फंड से बनी स्कूल की इमारत बच्चों के भविष्य के लिए होती है, ठेकेदार की सहूलियत या कागजी विकास दिखाने के लिए नहीं। अब पालक, नागरिक और शिक्षा क्षेत्र की नजर इस पर है कि वाई नगरपरिषद प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।