टाइम्स नाऊ एज्युकेशन समिट में केंद्रीय मंत्री मांडविया बोले, शिक्षा का मकसद सिर्फ नंबर और करियर नहीं
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने टाइम्स नाऊ एज्युकेशन समिट 2026 में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नया नजरिया अपनाने की अपील की।
'टाइम्स नाऊ एज्युकेशन समिट 2026' में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया नजरिया अपनाने की अपील की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा का मकसद सिर्फ अच्छे डॉक्टर, इंजीनियर, वकील या वैज्ञानिक बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है जिन्हें देश के प्रति अपने फर्ज का एहसास हो। इतना ही नहीं, उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था की सोच बदलने पर भी जोर दिया।
मंत्री ने कहा कि आज शिक्षा को स्कूल, कॉलेज, नंबरों की परसेंटेज और मिलने वाली नौकरी तक ही सीमित कर दिया गया है। पहले शिक्षा को परिवार, शिक्षक और समाज की साझा जिम्मेदारी माना जाता था। मांडविया ने चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों में हर उम्र में सही संस्कार डाले जाएं, तभी उनमें 'राष्ट्र प्रथम' यानी Nation First की भावना पैदा होगी और वे देश के आदर्श नागरिक बन पाएंगे।
सड़क सुरक्षा का उदाहरण देते हुए उन्होंने एक अहम बात कही। सरकार सड़क हादसों पर काबू पाने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च करके इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करती है, लेकिन अगर बचपन में ही स्कूल की क्लास में बच्चों को सड़क पार करने के सही नियम सिखा दिए जाएं, तो कई हादसे आसानी से टाले जा सकते हैं। उनका कहना था कि बड़ी सामाजिक समस्याओं का हल सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि स्कूल की क्लासरूम में दी जाने वाली सही शिक्षा से निकलता है।
आचार्य चाणक्य का हवाला देते हुए मांडविया ने कहा कि देश का भविष्य शिक्षकों के हाथों में गढ़ा जाता है। उनके मुताबिक, शिक्षकों को सिर्फ उपदेश देने की बजाय अपने खुद के आचरण से विद्यार्थियों के सामने मिसाल पेश करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की 60 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है। 'विकसित भारत 2047' का सपना पूरा करने के लिए इस युवा शक्ति को सिर्फ करियर की स्पष्टता नहीं, बल्कि सही दिशा और मार्गदर्शन की जरूरत है। इसके लिए सरकार ने 'माय भारत' यानी MY Bharat नाम का एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है। मांडविया ने अंत में शिक्षा क्षेत्र के जानकारों से अपील की कि वे युवाओं को राष्ट्र निर्माण की इस मुहिम से जोड़ें।