ताडोबा के बफर गांवों में तारू उद्यान, बच्चों के लिए सुरक्षित खेल मैदान और पर्यावरण शिक्षा
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर इलाके के गांवों में इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव रोकने के लिए तारू उद्यान बनाए जा रहे हैं।
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर इलाके में आने वाले गांवों में अब लोगों के लिए सुरक्षित सामुदायिक जगह बनाने की एक नई पहल शुरू हुई है, जिसका नाम रखा गया है तारू उद्यान। यह कदम इंसान और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते टकराव को देखते हुए उठाया गया है। भामडेली और हलदी जैसे कुछ बफर गांवों में तारू उद्यान बनकर तैयार भी हो गए हैं, जबकि कुछ और जगहों पर इनका काम अभी चल रहा है। ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने तय किया है कि बफर इलाके के सभी गांवों में ऐसे उद्यान बनाए जाएंगे।
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में सौ से ज्यादा गांव आते हैं। इन गांवों में लोग और जंगली जानवर एक ही इलाके में आते-जाते रहते हैं, जिसकी वजह से आपस में टकराव के मामले सामने आते रहते हैं। बाघ, तेंदुआ, भालू और गौर जैसे जंगली जानवरों की आमद गांवों के आस-पास के इलाकों में भी बढ़ गई है। इसी वजह से कई गांवों में माता-पिता अपने बच्चों को खुले मैदान में खेलने भेजने से पहले उनकी सुरक्षा को लेकर सोचते हैं। आवारा कुत्तों के हमले का भी खतरा बना रहता है। इसके अलावा बुजुर्गों को भी टहलने और आपस में मिलने-जुलने के लिए किसी सुरक्षित सार्वजनिक जगह की जरूरत महसूस होती रही है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित, चारदीवारी वाले और पर्यावरण के अनुकूल सामुदायिक स्थान के रूप में तारू उद्यान की योजना सामने आई।
तारू नाम जंगलों के पौराणिक रक्षक माने जाने वाले तारू देव के नाम पर रखा गया है। इस तरह इन उद्यानों के जरिए ताडोबा इलाके की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति से जुड़े पुराने रिश्ते को भी बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। ग्राम पंचायत और ग्राम पर्यावरण विकास समिति की सलाह से तय की गई सामुदायिक जमीन पर इन उद्यानों को विकसित किया जा रहा है। उद्यानों में चेन-लिंक फेंसिंग, गेट, बच्चों के खेलने के सामान, चलने के लिए रास्ते, बैठने के लिए बेंच, सोलर लाइट, कचरा पेटियां और पर्यावरण से जुड़ी जानकारी वाले बोर्ड लगाए जा रहे हैं। स्थानीय पेड़-पौधों की मदद से इन उद्यानों को सजाया जाएगा।
इस पहल का एक अहम हिस्सा यह है कि हर गांव में फ्रेंड्स ऑफ तारू नाम से बच्चों का क्लब बनाया जाएगा। इस क्लब में गांव के स्कूली बच्चे शामिल होंगे, जो उद्यान की देखभाल, पेड़ों को पानी देना, सफाई अभियान, पक्षी निरीक्षण और नेचर वॉक जैसे कामों में हिस्सा लेंगे। पर्यावरण दिन, वन्यजीव सप्ताह और वसुंधरा दिन जैसे मौकों पर भी अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों में जंगल, जंगली जानवरों और जैव विविधता के बारे में जागरूकता पैदा करने की कोशिश की जाएगी।