सूखे में किसानों से कर्ज वसूली रोकें, धाराशिव जिला कांग्रेस ने कलेक्टर से की मांग
धाराशिव जिला कांग्रेस ने जिलाधिकारी को निवेदन देकर मांग की है कि सूखे के हालात में कर्ज वसूली फौरन रोकी जाए। कांग्रेस का कहना है कि सूखे की वजह से किसान, खेतिहर मजदूर और दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग पैसों की तंगी में फंसे हैं, ऐसे में उन पर वसूली का दबाव बनाए रखना अन्याय है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष उमेश राजेनिंबाळकर की ओर से यह निवेदन जिलाधिकारी को दिया गया।
कांग्रेस ने कहा है कि जिले में डेढ़ महीने से ज्यादा वक्त से बारिश ने बड़ी उघाड़ दी है, यानी बारिश नहीं हुई। इसका असर खेती और खेती से जुड़े रोजगार पर पड़ा है। कमाई के रास्ते सूख जाने से कई परिवार आर्थिक परेशानी में हैं। इसके बावजूद सरकारी, निजी और सहकारी बैंकों, NBFC और फायनान्स कंपनियों की ओर से अलग-अलग कर्जों की किस्तों की वसूली चल रही है, ऐसा कांग्रेस ने कहा है।
निवेदन में दावा किया गया है कि दोपहिया, गाड़ी, बचत गट, खेती और सोना गिरवी रखकर लिए गए कर्ज समेत कई तरह के कर्जदारों से वसूली जारी है और इससे आर्थिक संकट और गहरा हो रहा है। इसलिए मांग की गई है कि सूखे के दौरान कर्ज वसूली को कुछ समय के लिए रोककर कर्जदारों को राहत दी जाए।
कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि जिला प्रशासन सभी बैंकों, NBFC और फायनान्स कंपनियों को इस बारे में जरूरी हिदायत दे। साथ ही जिला अग्रणी बैंक के जरिए सभी बैंकों को निर्देश देकर सूखा प्रभावित लोगों का सहयोग करने की अपील की जाए। निवेदन में कहा गया है, "उत्पन्न के रास्ते बंद होने पर कर्ज वसूली का दबाव बढ़ाने के बजाय प्रशासन को लोगों को राहत देने का रुख अपनाना चाहिए। इस मांग पर फौरन कार्रवाई की जाए।"
इस बीच, महाराष्ट्र में इस साल कम बारिश की वजह से कई इलाकों में सूखे के गंभीर हालात बने हैं। पानी की कमी, खरीफ फसलों का नुकसान, चारे का सवाल और बढ़ती आर्थिक मुश्किलों से किसान संकट में हैं। इस पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों के लिए अलग-अलग उपाय लागू करना शुरू किया है।
राज्य सरकार ने 305 तालुकाओं में सूखे के 'ट्रिगर-1' के तहत उपाय लागू करने की घोषणा की है। शुरुआत में 265 तालुकाओं को इसमें शामिल किया गया था, बाद में और तालुके जोड़े गए। सूखा प्रभावित इलाकों के किसानों, विद्यार्थियों और आम परिवारों को आर्थिक राहत देने के मकसद से कई फैसले लिए जा रहे हैं।
सूखे की मार झेल रहे परिवारों पर पढ़ाई के खर्च का बोझ कम करने के लिए सरकार ने दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का फैसला घोषित किया है। इसके पीछे मकसद यह है कि सूखा प्रभावित इलाकों के बच्चों की पढ़ाई पैसों की तंगी की वजह से न रुके।