SSC CGL टियर-1 के पहले दिन यूपी-बिहार में 60% से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा देने नहीं आए
कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा 2026 के पहले दिन उत्तर प्रदेश और बिहार के सेंटरों पर ज्यादातर रजिस्टर्ड उम्मीदवार गैरहाजिर रहे, जबकि भर्ती 10,731 पदों के लिए है।
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले नौजवानों के लिए कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल (SSC CGL) परीक्षा बहुत अहम मानी जाती है। लेकिन एसएससी सीजीएल 2026 के टियर-1 के पहले दिन एक फिक्र वाली तस्वीर सामने आई। उत्तर प्रदेश और बिहार के परीक्षा सेंटरों पर 60 प्रतिशत से ज्यादा रजिस्टर्ड उम्मीदवारों ने परीक्षा नहीं दी।
फॉर्म भरते वक्त नौजवानों में जो जोश दिखा था, वह परीक्षा हॉल तक पहुंचते-पहुंचते पूरी तरह ठंडा पड़ गया। यह चलन सिर्फ एक दिन या एक राज्य तक सीमित नहीं है। यह मुकाबले की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की बदलती सोच की तरफ इशारा करता है।
कर्मचारी चयन आयोग ग्रुप 'बी' और 'सी' के कुल 10,731 पदों पर भर्ती कर रहा है। इनमें सीबीआयसी (CBIC) और सीबीडीटी (CBDT) जैसे नामी विभागों में इंस्पेक्टर और टैक्स असिस्टेंट के हजारों पद शामिल हैं। इतनी बड़ी भर्ती के बावजूद सेंटरों पर खाली कुर्सियां सोचने पर मजबूर करती हैं।
परीक्षा न देने की वजहें पूरी तैयारी न होना या आखिरी वक्त का तनाव हो सकती हैं। यह भी कहा जा रहा है कि प्राइवेट सेक्टर में बढ़ते मौकों की वजह से अब नौजवान सोच-समझकर और गिने-चुने कदम उठा रहे हैं।
इस भर्ती से केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों में कुल 10,731 पद भरे जाएंगे। इनमें जनरल कैटेगरी के 4,412 पद, ओबीसी के 2,772 पद, ईडब्ल्यूएस के 1,028 पद, एससी के 1,715 पद और एसटी के 804 पद हैं। सीबीआयसी और सीबीडीटी के इंस्पेक्टर और टैक्स असिस्टेंट के पद सबसे ज्यादा खिंचाव का केंद्र हैं।
अक्सर नौजवान दोस्तों की देखादेखी या घरवालों के दबाव में बिना पढ़ाई किए फॉर्म भर देते हैं। परीक्षा नजदीक आने पर उन्हें फेल होने का डर सताने लगता है। फिर यह परीक्षा सीबीटी (CBT) यानी कंप्यूटर पर होती है, जिसमें सिर्फ 60 मिनट में 100 सवाल हल करने होते हैं। निगेटिव मार्किंग का डर भी रहता है, इसलिए कई उम्मीदवार सेंटर पर जाने से ही बचते हैं।
इतने उम्मीदवारों के परीक्षा छोड़ने का असर कटऑफ पर क्या पड़ेगा, इस पर भी बात हो रही है। जो उम्मीदवार गंभीर हैं और पढ़ाई में लगातार मेहनत करते हैं, उनके लिए यह अच्छी खबर है। 60 प्रतिशत से ज्यादा गैरहाजिरी से मुकाबला काफी कम हो गया है। इसका सीधा असर टियर-1 के कटऑफ और कुल मुकाबले पर पड़ेगा। सही रणनीति बनाकर पढ़ने वाले उम्मीदवारों के लिए दिसंबर में होने वाली टियर-2 परीक्षा तक पहुंचना थोड़ा आसान हो सकता है।