स्मार्ट मीटर लगने से बिजली का बिल बढ़ता है क्या? जानिए नॉर्मल मीटर से फर्क
महाराष्ट्र में स्मार्ट मीटर को लेकर घर-घर में चर्चा है, बिल बढ़ने की शिकायतों के बीच जानिए असल नियम क्या कहते हैं
महाराष्ट्र में बिजली मीटर के डिजिटलीकरण के बाद स्मार्ट मीटर को लेकर घर-घर में चर्चा शुरू हो गई है। पुराने जमाने के मीटर में कर्मचारी एक तय समय के बाद घर आकर रीडिंग लेते थे, जबकि स्मार्ट मीटर में बिजली के इस्तेमाल का डेटा डिजिटल तरीके से दूर से ही मिल जाता है। केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक स्मार्ट मीटर की रीडिंग दिन में कम से कम एक बार डिजिटली लेने का प्रावधान है, और ग्राहकों को उनके इस्तेमाल का डेटा डिजिटल माध्यम से दिखाना जरूरी है।
पहले नॉर्मल यानी पारंपरिक मीटर में क्या होता था? मीटर पर लगे यूनिट्स देखकर रीडिंग नोट की जाती थी। महाराष्ट्र में अभी की व्यवस्था में ऑफिशियल मीटर रीडर से रीडिंग लेने का नियम है। कभी-कभी अगर रीडिंग नहीं ली जा सके तो औसत इस्तेमाल के आधार पर बिल आ जाता है। महावितरण अपने ऐप या पोर्टल के जरिए ग्राहकों को खुद सेल्फ रीडिंग देने की सुविधा भी देता है।
स्मार्ट मीटर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हर बार रीडिंग के लिए किसी कर्मचारी को घर आने की जरूरत कम हो जाती है, क्योंकि मीटर का डेटा दूर से ही मिल जाता है। ग्राहक को अपने इस्तेमाल का डेटा डिजिटल माध्यम से देखने की सुविधा मिलती है। इससे असली रीडिंग, अंदाजे से आया बिल और इस्तेमाल में हुए बदलाव को समझना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
अब सवाल यह उठता है कि स्मार्ट मीटर लगने से बिल ज्यादा आता है क्या? सिर्फ स्मार्ट मीटर लग जाने भर से प्रति यूनिट बिजली का दर अपने आप नहीं बढ़ता। बिल में जो टैरिफ लागू है, असल इस्तेमाल कितना हुआ, फिक्स्ड चार्ज और बाकी लागू फैक्टर, ये सब मायने रखते हैं। लेकिन स्मार्ट मीटर से रीडिंग ज्यादा सटीक और नियमित मिलती है, इसलिए अगर पहले अंदाजे से बिल आ रहा था तो असल इस्तेमाल के हिसाब से बिल में फर्क दिख सकता है। इसलिए बिल बढ़ने का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि मीटर ने गलत रीडिंग ली है।
सरकार के नियम इस बारे में क्या कहते हैं? 2023 में केंद्र सरकार के बनाए नियमों के मुताबिक स्मार्ट मीटर की रीडिंग दिन में कम से कम एक बार दूर से लेने का प्रावधान है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उससे पहले के समय की मैक्सिमम डिमांड के आधार पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। साथ ही अगर स्मार्ट मीटर से दर्ज मैक्सिमम डिमांड मंजूर लोड से ज्यादा निकलती है, तो उस बिलिंग साइकिल में असल दर्ज हुई डिमांड के आधार पर ही हिसाब लगाने का नियम है।
ग्राहकों को इसमें क्या ध्यान रखना चाहिए? स्मार्ट मीटर लगने के बाद ऐप या जो भी डिजिटल माध्यम उपलब्ध हो, उससे अपना इस्तेमाल समय-समय पर चेक करते रहना फायदेमंद रहता है। अगर बिल उम्मीद से ज्यादा लगे तो यूनिट्स, मीटर की रीडिंग और बिल में लगे बाकी चार्ज को जरूर जांच लें। शिकायत होने पर महावितरण के पास इसकी जांच के लिए संपर्क किया जा सकता है।