स्कूल-जन्म प्रमाणपत्रों में 'हिंदू वैश्य' दर्ज लोगों को ओबीसी में राहत, सरकार का आदेश
सिंधुदुर्ग में वैश्य वाणी समाज की 2008 से चली मांग को आखिरकार सरकारी मंजूरी मिली।
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पुराने कागजातों में जिनका दर्ज सरनेम 'हिंदू वैश्य' है, उन लोगों को ओबीसी जाति प्रमाणपत्र और जाति पड़ताल प्रमाणपत्र (वैलिडिटी) बनवाने में जो दिक्कत आ रही थी, अब उससे छुटकारा मिलने वाला है। राज्य सरकार ने 'हिंदू वैश्य' इस प्रविष्टि को साफ-साफ ओबीसी प्रवर्ग में शामिल करते हुए आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले से वैश्य वाणी समाज के लोगों को बड़ी राहत मिली है और समाज की तरफ से इसका स्वागत किया गया है। सिंधुदुर्ग जिला वैश्य वाणी समाज के अध्यक्ष सुनील भोगटे ने राज्य सरकार और संबंधित लोकप्रतिनिधियों का आभार माना है।
कुडाळ एमआयडीसी में हुई एक पत्रकार परिषद में सुनील भोगटे ने इस पूरे फैसले की पृष्ठभूमि बताई। इस मौके पर कुडाळ तालुकाध्यक्षा सुचित्रा भोगटे, पतसंस्था के डायरेक्टर एडवोकेट समीर वंजारी, उमेश वाळके, विजय भोगटे वगैरह मौजूद थे। भोगटे ने बताया कि वैश्य वाणी समाज को ओबीसी प्रवर्ग से हटाए जाने के बाद 2008 से ही समाज के प्रतिनिधि इसके लिए पीछे पड़े हुए थे। उस वक्त के समाजकल्याण मंत्री श्री मोगे और तत्कालीन सांसद नारायण राणे की मदद से मंत्रालय में कई बैठकें हुई थीं। इसके बाद मागासवर्ग आयोग बनाया गया, जिसने सिंधुदुर्ग जिले में जाकर पड़ताल की और रिपोर्ट सौंपी। इसी के आधार पर 2011 के सरकारी निर्णय में क्रमांक 190 पर 'हिंदू वाणी' और 'हिंदू वैश्यवाणी' को ओबीसी प्रवर्ग में शामिल किया गया था।
दिक्कत यह थी कि उस वक्त 'हिंदू वैश्य' इस प्रविष्टि का साफ जिक्र नहीं हो पाया था, जिसकी वजह से समाज के कई लोगों को जाति प्रमाणपत्र और वैलिडिटी बनवाने में परेशानी झेलनी पड़ रही थी। खासकर स्कूल के दाखले, जन्म का रिकॉर्ड और जमीन के कागजातों में 'वैश्य' या 'हिंदू वैश्य' दर्ज लोगों को इस तकनीकी अड़चन का सीधा नुकसान हो रहा था। इसीलिए समाज लगातार 'हिंदू वैश्य' प्रविष्टि को भी साफ तौर पर शामिल करने की मांग कर रहा था।
इस मसले को सुलझाने के लिए 25 अगस्त को मंत्रालय में समाजकल्याण मंत्री अतुल सावे और उद्योगमंत्री उदय सामंत की मौजूदगी में बैठक हुई। इस बैठक में विधायक किरण सामंत, विधायक प्रमोद जठार, विधायक अमल महाडिक, रत्नागिरी के विकास शेठ्ये, लांजा के प्रसन्न शेठ्ये और सिंधुदुर्ग से सुनील भोगटे, एडवोकेट समीर वंजारी और उमेश वाळके शामिल हुए। चूंकि उस वक्त एडमिशन का सीजन चल रहा था, इसलिए उद्योगमंत्री उदय सामंत ने तुरंत सरकारी आदेश निकालने की मांग रखी थी। सुनील भोगटे ने बताया कि इसी के चलते सिर्फ दस दिन के भीतर 'हिंदू वैश्य' प्रविष्टि को शामिल करते हुए सरकार ने साफ आदेश जारी कर दिया।
भोगटे ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से 'हिंदू वाणी', 'हिंदू वैश्य' और 'हिंदू वैश्यवाणी' दर्ज लोगों के साथ-साथ 1967 से पहले का सबूत जोड़ने वाले समाज के लोगों को भी ओबीसी जाति प्रमाणपत्र और जाति पड़ताल प्रमाणपत्र मिलना अब आसान हो जाएगा। इसका फायदा एडमिशन, सरकारी नौकरी और राजनीतिक आरक्षण में मिलेगा। इस मौके पर उन्होंने मुख्यमंत्री, उद्योगमंत्री उदय सामंत, समाजकल्याण मंत्री अतुल सावे, विधायक प्रमोद जठार के साथ-साथ पहले भी समाज की मांग में साथ देने वाले तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और सांसद नारायण राणे, विधायक दीपक केसरकर और राजन तेली का भी सार्वजनिक तौर पर आभार माना।