गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:02 IST

सिंध प्रांत के बंटवारे की योजना पर भड़के बिलावल भुट्टो, फौज को दी खुली चेतावनी

पाकिस्तान में प्रांतों के पुनर्गठन के प्रस्ताव पर सिंध में जबरदस्त विरोध, PPP और सिंध विधानसभा ने ठुकराया प्रस्ताव

सिंध प्रांत के बंटवारे की योजना पर भड़के बिलावल भुट्टो, फौज को दी खुली चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पाकिस्तान की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, ऐसा दावा करते हुए शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी फौज ने देश को नए सिरे से बांटने की तैयारी शुरू कर दी है। इस नई योजना के तहत सिंध, पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा इन चार बड़े प्रांतों को तोड़कर करीब 12 से 15 छोटे प्रांत बनाए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन फौज के इस फैसले ने पूरे मुल्क में, खासकर सिंध प्रांत में गुस्से की आग भड़का दी है।

सिंध में सत्ता में बैठी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) ने इस प्रस्ताव के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल दिया है। लंदन में अपने पिता और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ मौजूद बिलावल भुट्टो-जरदारी ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिलावल ने फौज प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के करीबी माने जाने वाले गृहमंत्री मोहसिन नकवी पर सीधे निशाना साधा है। बिलावल ने नकवी को फटकारते हुए साफ कहा कि प्रांतों के बंटवारे जैसा बेहद संवेदनशील और संवैधानिक मुद्दा किसी व्यावसायिक मंच या निजी बैठकों में उठाना बंद किया जाए। अगर फौज और सरकार सच में प्रांतों को बांटना ही चाहते हैं, तो उन्हें कोई बहाना ढूंढने के बजाय सीधे देश की संसद और संबंधित प्रांतीय विधानसभाओं में यह प्रस्ताव लाना चाहिए। इस पर जनप्रतिनिधियों के सामने संसद में खुली बहस होनी चाहिए, ऐसी सीधी चेतावनी बिलावल ने दी है।

पाकिस्तान की सिंध विधानसभा पहले ही इस प्रस्ताव को एकमत से ठुकरा चुकी है। सिंध की क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा, ऐसा प्रस्ताव विधानसभा में पास किया गया। सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह और बाकी वरिष्ठ मंत्रियों ने साफ कहा है कि सिंध की जमीन उनकी मां है और उसके टुकड़े करने के लिए कोई भी सिंधी नागरिक तैयार नहीं होगा। अगर फौज ने जबरदस्ती सिंध प्रांत को बांटने या कराची को अलग करने की कोशिश की, तो पाकिस्तान में बलूचिस्तान जैसे गृहयुद्ध वाले हालात बन सकते हैं, ऐसी चेतावनी भी प्रांतीय नेताओं ने दी है।

दरअसल फौज प्रमुख आसिम मुनीर और गृहमंत्री मोहसिन नकवी की दलील है कि मौजूदा प्रांत भौगोलिक तौर पर बहुत बड़े हैं और सत्ता का केंद्र बीच में सिमटा हुआ है, जिस वजह से हेल्थ, एजुकेशन और कानून-व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं आम जनता तक नहीं पहुंच पातीं। छोटी प्रशासनिक इकाइयां बनाने से प्रशासनिक कामकाज बेहतर होगा, ऐसा फौज का दावा है।

लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस प्रस्ताव के पीछे फौज का एक बड़ा राजनीतिक मकसद छिपा है। सिंध हमेशा से भुट्टो परिवार और PPP का मजबूत गढ़ रहा है। अगर सिंध के 3 से 4 टुकड़े कर दिए गए, तो PPP का राजनीतिक असर और जनाधार अपने आप खत्म हो जाएगा। फौज सभी प्रांतों पर सीधा कंट्रोल चाहती है, इसीलिए वह प्रशासनिक सुधार के नाम पर प्रांतों को तोड़ना चाहती है। इस पूरे विवाद से पाकिस्तान की सत्ताधारी गठबंधन में भी बड़ी दरार दिखने लगी है। एक तरफ शहबाज शरीफ सरकार के कुछ मंत्री इस प्रस्ताव के समर्थन में माहौल बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ PPP जैसा बड़ा सहयोगी दल सीधे फौज से भिड़ने को तैयार हो गया है। अगर सिंध के बंटवारे का यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो पाकिस्तान की मौजूदा सरकार गिरने की आशंका जताई जा रही है।

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