मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
17:35 IST

श्रीलंका में भीषण सूखा: बौद्ध भिक्षुओं ने विमान से की बारिश की प्रार्थना, पवित्र जल छिड़का

श्रीलंका में दशकों के सबसे गंभीर जल संकट के बीच वायुसेना ने भिक्षुओं को विमान से सूखाग्रस्त इलाकों में भेजा, जहां से प्रार्थना और पवित्र जल का छिड़काव किया गया।

श्रीलंका में भीषण सूखा: बौद्ध भिक्षुओं ने विमान से की बारिश की प्रार्थना, पवित्र जल छिड़का
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दक्षिण एशियाई देश श्रीलंका इन दिनों पिछले कई दशकों के सबसे भीषण जल संकट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में बारिश ने दगा दे दिया है, जिससे नदियां, कुएं और सिंचाई के जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं। पीने के पानी की भारी किल्लत से लोग परेशान हैं। इस इंसानी और प्राकृतिक संकट की घड़ी में बारिश के लिए धार्मिक परंपरा और आस्था का सहारा लिया जा रहा है।

श्रीलंकन एयर फोर्स ने इस संकट के बीच एक अनोखा कदम उठाया। भगवा वस्त्र पहने तीन बौद्ध भिक्षुओं को खास वाय-१२ (Y-12) मिलिट्री विमान से सूखाग्रस्त इलाकों के ऊपर हवाई दौरे पर ले जाया गया। आसमान में उड़ते इस विमान से भिक्षुओं ने देश में बारिश हो और सूखे की मार कम हो, इसके लिए खास प्रार्थना यानी पिरिथ पठण किया। इसी के साथ विमान से नीचे सूखी जमीन, सूखे खेतों और खाली पड़े जलाशयों पर पवित्र जल भी छिड़का गया।

श्रीलंकन एयर फोर्स ने सोशल मीडिया पर इस मुहिम की तस्वीरें और जानकारी शेयर करते हुए लिखा, "जब पूरा देश सूखे मौसम और भीषण अकाल के साये में है, तब यह विमान आसमान में करुणा और उम्मीद के प्रतीक के तौर पर उड़ रहा है।"

इस सूखे की सबसे ज्यादा मार श्रीलंका के उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी प्रांतों पर पड़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक देश के कई कृषि क्षेत्रों में सामान्य बारिश के मुकाबले 85 से 100 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है। इससे खेतों में दरारें पड़ गई हैं और फसलें पूरी तरह सूख गई हैं। गांवों और शहरों के कुएं तथा छोटे-बड़े जलाशय तल तक खाली हो गए हैं। कुछ बड़े जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का मात्र 10 से 50 प्रतिशत पानी ही बचा है, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।

पीने के पानी की जरूरत पूरी करने के लिए सरकार को दूर-दराज के इलाकों में टैंकर से पानी पहुंचाना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कुछ बेहद दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में लोगों को पानी के एक टैंकर के लिए 23-23 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस पानी की भारी किल्लत से न सिर्फ इंसानी जिंदगी अस्तव्यस्त हुई है, बल्कि पशुधन और पालतू जानवरों की भी पानी के बिना तड़प-तड़प कर मौत हो रही है।

श्रीलंका का यह संकट सिर्फ पीने के पानी या खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। बिजली बनाने वाले प्रमुख जलाशयों का पानी स्तर आधे से भी नीचे गिर जाने से देश में बिजली उत्पादन पर बड़ा दबाव आया है। अगर जल्द भारी बारिश नहीं हुई, तो देश में बड़े पैमाने पर लोडशेडिंग और ऊर्जा संकट पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

दूसरी तरफ, प्रकृति और वन्यजीवों पर भी इस सूखे का बहुत बुरा असर पड़ा है। श्रीलंका के मशहूर और सबसे बड़े अभयारण्य माने जाने वाले याला नेशनल पार्क (Yala National Park) में पानी के स्रोत सूख जाने से जानवरों के पीने के पानी का सवाल गंभीर बन गया है। इस वजह से प्रशासन को इस नेशनल पार्क के कुल 6 डिवीजन में से 2 डिवीजन पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद करने पड़े हैं।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक श्रीलंका के इस भीषण हालात की वजह वैश्विक जलवायु परिवर्तन और एल निनो (El Nino) नाम के प्राकृतिक मौसमी घटक का तीव्र असर है। एल निनो की वजह से प्रशांत महासागर के पानी के तापमान में बढ़ोतरी होती है, जिससे हवाओं की रफ्तार और बारिश का पैटर्न पूरी दुनिया में बदल जाता है। इस बार का एल निनो बेहद तीव्र होने से श्रीलंका में बारिश का प्रमाण काफी घट गया है।

श्रीलंका के मौसम विभाग ने आगे के लिए बेहद उलझा हुआ इशारा दिया है। सितंबर के आखिर से लेकर दिसंबर तक देश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। लेकिन विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस बारिश के बाद फिर एक बार भीषण सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। इस तरह एक तरफ बेमौसम भारी बारिश और दूसरी तरफ भीषण सूखा, इस दोहरे संकट का सामना श्रीलंका के लोगों को करना पड़ रहा है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे