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19:39 IST

श्रीलंका ईस्टर बॉम्ब हमला: 15 दोषियों को 220 साल की सजा, कोलंबो हाई कोर्ट का फैसला

2019 के ईस्टर संडे आत्मघाती हमलों में कोलंबो हाई कोर्ट ने पांच साल की सुनवाई के बाद 15 आरोपियों को उम्रकैद जैसी लंबी सजा सुनाई, जबकि 9 को सबूतों की कमी में बरी कर दिया गया।

श्रीलंका ईस्टर बॉम्ब हमला: 15 दोषियों को 220 साल की सजा, कोलंबो हाई कोर्ट का फैसला
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

श्रीलंका के 2019 के ईस्टर आत्मघाती हमले मामले में आखिरकार फैसला आ गया है। कोलंबो हाई कोर्ट की विशेष बेंच (Trial-at-Bar) ने इस ऐतिहासिक केस में 15 आरोपियों को हर एक को 200 से 260 साल तक की सजा सुनाई है, औसतन यह सजा 220 साल की सक्तमजूरी की तुरंगवास की बनती है। 270 से ज्यादा बेकसूर लोगों की जान लेने वाले और 500 से ज्यादा लोगों को जख्मी करने वाले इस भयानक दहशतगर्दी वाले हमले पर पांच साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद यह अहम फैसला सुनाया गया।

जस्टिस नवरत्ने मरासिंघे, जस्टिस रामनाथन कन्नन और जस्टिस सुजीव निस्संका, इन तीन जजों वाली स्पेशल हाई कोर्ट बेंच ने इस केस का आखिरी फैसला पढ़कर सुनाया। कुल 24 आरोपियों में से 15 को कोर्ट ने मुख्य साजिश रचने, दहशतगर्दी की गतिविधियों में मदद करने, हत्या करने और विस्फोटक रखने जैसे संगीन जुर्मों में दोषी ठहराया, जबकि बाकी 9 लोगों को सबूत ना होने की वजह से बरी कर दिया गया। कोर्ट ने दोषी ठहराए गए सभी 15 लोगों की जमीन-जायदाद और चल संपत्ति जब्त करने का आदेश भी सरकार को दिया है।

21 अप्रैल 2019 को ईस्टर संडे के पवित्र दिन श्रीलंका में एक के बाद एक भयानक आत्मघाती बम धमाके किए गए थे। आईएसआईएस (ISIS) नाम के इंटरनेशनल दहशतगर्द संगठन से जुड़े लोकल इस्लामिक चरमपंथी ग्रुप 'नेशनल थोहीद जमात' (NTJ) के 9 सुसाइड बॉम्बरों ने ये हमले किए थे। दहशतगर्दों ने कोलंबो और आसपास के तीन बड़े कैथोलिक चर्च और तीन पांच सितारा होटलों को निशाना बनाया था। इस भयानक नरसंहार में 11 भारतीय लोगों समेत कुल 270 बेकसूर लोग मौके पर ही मारे गए थे, वहीं 500 से ज्यादा लोग गंभीर घायल हुए थे।

इस केस की सुनवाई बहुत ही पेचीदा और लंबी थी। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कुल 2,309 गवाहों से पूछताछ की। सभी आरोपियों पर मिलाकर 23,270 अलग-अलग आरोप तय किए गए थे। कोर्ट ने इस केस के मुख्य सरगना और आरोपी 'नौफर मौलवी' (Mohammadu Ebrahim Mohammadu Naufer) को भी मुख्य साजिश रचने का दोषी ठहराया और उसे 220 साल की कड़ी सजा सुनाई। कोर्ट में यह साबित हुआ कि नौफर मौलवी ने अपने धार्मिक भाषणों के जरिए दूसरे नौजवानों का ब्रेन वॉश करके उन्हें दहशतगर्दी के रास्ते पर धकेला था।

श्रीलंका के इस भयानक आत्मघाती हमले के तार भारत से और भारत से फरार हुए कट्टरपंथी उपदेशक जाकिर नाइक से भी जुड़े पाए गए थे। हमले के बाद श्रीलंका की सुरक्षा एजेंसियों की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं। गिरफ्तार हुए कई दहशतगर्दों और शक के दायरे में आए लोगों ने सुरक्षा एजेंसियों को दिए बयान में साफ कहा था कि वे भारत से फरार हुए विवादित धर्मगुरु जाकिर नाइक के ऑनलाइन वीडियो और भड़काऊ भाषण देखकर कट्टरपंथी बने थे, और उसके बाद ही वे दहशतगर्द संगठन में शामिल हुए। जाकिर नाइक के खिलाफ भारत में भी कानूनी कार्रवाई शुरू होने के बाद वह मलेशिया भाग गया था और तब से वहीं रह रहा है।

इस दहशतगर्दी वाले हमले के बाद श्रीलंका में बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया था। भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने संभावित दहशतगर्दी हमले के बारे में कई हफ्ते पहले ही श्रीलंका के प्रशासन को साफ और सटीक पूर्व सूचना दी थी। लेकिन इतनी संवेदनशील गुप्त जानकारी मिलने के बावजूद सही एहतियात ना बरतने और हमला रोकने में नाकाम रहने के लिए उस वक्त के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना और उस वक्त के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे पर जमकर सवाल उठे थे। इस घटना से श्रीलंका की अंदरूनी सुरक्षा में जो खामियां थीं वे उजागर हो गई थीं, और इसका बड़ा असर देश के टूरिज्म और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा था। 5 साल बाद आए इस फैसले से मरने वालों के घरवालों और पीड़ितों को कुछ हद तक राहत मिली है।

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