शिवसेना नाम-चिन्ह विवाद: शिंदे गुट की दलील बुधवार तक टली, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब आगे
शिवसेना पार्टी और धनुष्यबाण चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद सुप्रीम कोर्ट में अभी भी लंबित है, मंगलवार की सुनवाई टली।
शिवसेना पार्टी और धनुष्यबाण चुनाव चिन्ह को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहा विवाद अभी सुलझा नहीं है। फिलहाल यह चिन्ह राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के शिवसेना गुट के पास है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इसे चुनौती दे रखी है। इसी मामले पर मंगलवार को होने वाली सुनवाई नहीं हो पाई। मिली जानकारी के मुताबिक तीन सदस्यीय बेंच की बैठक नहीं बुलाई जा सकी, जिसके चलते सुनवाई आगे बढ़ा दी गई।
अब इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। इस तीन सदस्यीय बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। इससे पहले 16 और 17 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे गुट की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील नीरज किशन कौल ने चुनाव आयोग के फैसले के समर्थन में दलील रखी थी। शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के उस फैसले का समर्थन किया, जिसमें एकनाथ शिंदे को शिवसेना का नाम और चिन्ह दिया गया था।
वहीं दूसरी तरफ ठाकरे गुट की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल और देवदत्त कामत ने दलील दी कि चुनाव आयोग का यह फैसला संविधान में दिए गए कानूनों का उल्लंघन करता है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की फैसला लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए थे। कोर्ट ने पूछा कि ठाकरे और शिंदे, दोनों गुटों को अलग-अलग चिन्ह देने के विकल्प पर विचार क्यों नहीं किया गया। शिंदे गुट के वकीलों ने यह भी दलील दी कि पिछले चुनाव में शिंदे गुट को उद्धव ठाकरे गुट के मुकाबले ज्यादा वोट मिले थे, जो जनता का समर्थन दिखाता है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ये वोट किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि शिवसेना के लिए थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों गुटों को शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर निर्भर रहने के बजाय अपने दम पर वोट हासिल करने की अपनी क्षमता दिखानी चाहिए थी। ठाकरे गुट ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह धनुष्यबाण को फ्रीज करने की मांग रखी है।