शी जिनपिंग से मुलाकात से पहले रेअर अर्थ खनिजों को लेकर ट्रम्प का रुख नरम
अमेरिका-चीन के बीच होने वाली शिखर बैठक से पहले ट्रम्प प्रशासन ने चीन के खिलाफ अपना आक्रामक रुख फिलहाल टाल दिया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की शिखर बैठक होने से पहले दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। चीन की रेअर अर्थ खनिजों पर मजबूत पकड़ की वजह से ट्रम्प प्रशासन ने चीन के खिलाफ अपनी हमेशा की आक्रामक भूमिका लेने से फिलहाल परहेज किया है। टेक्नोलॉजी और व्यापार क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है।
रेअर अर्थ खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, चिप्स, आधुनिक टेक्नोलॉजी, डिफेंस इक्विपमेंट और तरह-तरह के इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स में होता है। इन खनिजों की खुदाई से लेकर शुद्धिकरण और मैग्नेट बनाने तक हर स्टेज में चीन का बड़ा हिस्सा है। यही वजह है कि इन खनिजों की सप्लाई रोकने या कम करने की क्षमता चीन के लिए एक बड़ी रणनीतिक ताकत बन जाती है।
पिछले साल अमेरिका-चीन के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ने के बाद चीन ने रेअर अर्थ के एक्सपोर्ट पर पाबंदियां लगा दी थीं। इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ा था। इसी वजह से चीन पर बड़ा आर्थिक या टेक्नोलॉजिकल दबाव डालने से पहले अमेरिका को भी इसके नतीजों के बारे में सोचना पड़ रहा है।
शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक से पहले ट्रम्प प्रशासन ने चीन पर कोई नया बड़ा टैक्स लगाने या अमेरिकी टेक्नोलॉजी के एक्सपोर्ट पर व्यापक पाबंदियां लगाने जैसा कोई कदम नहीं उठाया है। इससे साफ है कि फिलहाल चीन को लेकर अमेरिका का रवैया काफी सोच-समझकर, सावधानी भरा नजर आ रहा है।
इन बातचीत में रेअर अर्थ के साथ-साथ व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जरूरी खनिजों की सप्लाई के मुद्दे भी अहम रहने वाले हैं।
ट्रम्प और शी की मुलाकात 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में होनी है। इस बैठक से पहले दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच व्यापार, AI और रेअर अर्थ खनिजों को लेकर बातचीत जारी है।
अमेरिका के लिए रेअर अर्थ के मामले में चीन पर अपनी निर्भरता कम करना एक लंबे समय की चुनौती है। तब तक चीन से मिलने वाले इन खनिजों की सप्लाई का मुद्दा अमेरिका-चीन के व्यापार को लेकर होने वाली बातचीत में एक बड़ा दबाव बिंदु बना रहने की संभावना है।