शरणागत नक्षली कमांडर का खुलासा: जंगल का हथियारबंद नक्षलवाद अब शहरों के कॉलेजों में
आत्मसमर्पण कर चुके नक्षली कमांडर विकास उर्फ अनिल रामास्वामी मेकला ने नागपुर में फर्जी पहचान और एक निर्दोष छात्र के फंसने की कहानी बताई।
महाराष्ट्र के अलग अलग शहरों में स्कूल कॉलेज में पढ़ते हुए साथी छात्रों और नौजवानों को चुन चुनकर हथियारबंद नक्षली आंदोलन में धकेलने वाले विकास रामास्वामी मेकला उर्फ अनिल नागपुरे ने अपनी चौंकाने वाली कबूली दी है। छत्रपती संभाजीनगर, कोल्हापुर और मुंबई में रहते हुए उसने क्या किया, यह उसने खुद कैमरे के सामने कबूल किया। मां-बाप के आत्मसमर्पण के बाद अचानक मुंबई छोड़नी पड़ी, इसके बाद वह पहले चंद्रपुर और फिर नागपुर आया।
नागपुर में विकास रामास्वामी का अनिल नागपुरे कैसे बना, इसकी भी कहानी उसी ने बताई। मुंबई में रहते हुए उसका नाम कभी विकास तो कभी नवज्योत था। मगर मुंबई अचानक छोड़नी पड़ी तो वहीं वह नाम और सारे डॉक्युमेंट भी छूट गए। नागपुर आकर उसने अनिल नागपुरे नाम रखा। इसके लिए उसके मार्गदर्शक मिलिंद तेलतुंबडे, जिसे महाराष्ट्र का अब तक का सबसे बड़ा नक्षली कमांडर बताया जाता है, ने अनिल नागपुरे नाम के एक असली छात्र के दसवीं पास की मार्कशीट और स्कूल छोड़ने का सर्टिफिकेट लाकर दिया। इन्हीं दो डॉक्युमेंट के आधार पर कुछ और फर्जी कागज बनाकर उसने नागपुर के धनवटे कॉलेज में दाखिला ले लिया। विकास ने यह भी दावा किया कि असली अनिल पढ़ाई में तेज नहीं था और उसे आगे पढ़ना भी नहीं था, इसलिए उसने खुद ही अपने डॉक्युमेंट मिलिंद तेलतुंबडे को दे दिए थे।
नागपुर में पढ़ाई के दौरान वह चंदन नगर, मेडिकल चौक, पाचपावली, जरीपटका जैसे इलाकों में कुछ कुछ महीनों में घर बदलते हुए रहा। नागपुर में उसने ग्यारहवीं से लेकर बीए सेकंड ईयर तक बिना किसी दिक्कत के पढ़ाई की, जबकि मुंबई में भी वह बीए सेकंड ईयर तक पढ़ चुका था लेकिन वहां के डॉक्युमेंट छूट गए थे इसलिए नागपुर में नए नाम से दोबारा ग्यारहवीं से पढ़ाई शुरू की।
इसी दौरान चंद्रपुर में उनके 19 नक्षली साथी पुलिस के हाथ लग गए और उसी जांच की अगली कड़ी ढूंढते हुए पुलिस ने नागपुर में भी तलाश शुरू कर दी। पुलिस उसके कॉलेज तक पहुंच गई और अनिल नागपुरे नाम पता चलते ही उसकी तलाश शुरू कर दी। मगर विकास पुलिस के हाथ नहीं लगा, इसलिए असली अनिल नागपुरे को, जिसके डॉक्युमेंट इस्तेमाल कर विकास फर्जी नाम से पढ़ाई कर रहा था, पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और कई दिनों तक उससे पूछताछ की। जब पुलिस को पता चला कि यह असली अनिल नागपुरे है और उसके डॉक्युमेंट किसी नक्षलवादी ने इस्तेमाल किए हैं, तब उसे छोड़ दिया गया। मगर तब तक विकास नागपुर छोड़कर गडचिरोली के जंगल में सुरक्षित पहुंच चुका था।
विकास रामास्वामी का दावा है कि उन्होंने सिर्फ अनिल नागपुरे के डॉक्युमेंट इस्तेमाल किए, उसे पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं थी इसलिए उसका पढ़ाई में कोई नुकसान नहीं हुआ। उल्टा उसने बताया कि उसके नाम पर ली गई पढ़ाई से बारहवीं में 75 फीसदी नंबर आए, जो असली अनिल कभी ला ही नहीं सकता था, ऐसा भी विकास रामास्वामी ने कहा।
इस पूरे मामले से महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में नक्षलवाद का जाल किस तरह फैला है, इसका बड़ा खुलासा हुआ है। आत्मसमर्पण कर चुके नक्षली कमांडर विकास उर्फ अनिल रामास्वामी मेकला ने बताया कि उसने छत्रपती संभाजीनगर, कोल्हापुर और मुंबई के नामी रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज में पढ़ते हुए छात्रों को माओवादी विचारधारा की तरफ किस तरह आकर्षित किया। इस पूरी बातचीत पर नक्षलविरोधी मुहिम के विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटील ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शहरी नक्षलवाद देश और राज्य की सुरक्षा के सामने एक बड़ी चुनौती है।