मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
17:34 IST

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, सुबह 6:19 से 10:12 तक घटस्थापना का मुहूर्त

पंचांग के मुताबिक शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा और 20 अक्टूबर को दसरा के साथ खत्म होगा।

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, सुबह 6:19 से 10:12 तक घटस्थापना का मुहूर्त
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नवरात्र आते ही माहौल बदल जाता है। देवी का त्योहार, नौ दिन का उपवास, जागरण और गरबा। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र को बहुत अहम माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में दुर्गा माता पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। नौ दिनों में नौ अलग-अलग देवियों की पूजा की जाती है। अब सबके मन में सवाल है कि 2026 की नवरात्र ठीक कब से है और घट बिठाने का मुहूर्त क्या है।

पंचांग के मुताबिक इस साल शारदीय नवरात्र अक्टूबर महीने में है। प्रतिपदा 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगी। नवरात्र का पहला दिन रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को होगा। आखिरी दिन यानी दशहरा 20 अक्टूबर को है। 11 से 20 अक्टूबर तक के नौ दिन देवी के होंगे।

नवरात्र के पहले दिन घट बिठाया जाता है, जिसे कलश स्थापना भी कहते हैं। इस बार मुहूर्त सुबह का है। घट बिठाने का शुभ समय सुबह 6 बजकर 19 मिनट से सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक है। सुबह न हो पाए तो दोपहर में अभिजीत मुहूर्त है, जो 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस वक्त में घट बिठाना बहुत अच्छा माना गया है।

इस साल अष्टमी 18 अक्टूबर को है और इसी दिन महाअष्टमी का उपवास रखा जाता है। नवमी 19 अक्टूबर को है। उस दिन सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक अष्टमी रहेगी, उसके बाद नवमी लगेगी। नवमी पर हवन किया जाता है। हवन के लिए सबसे अच्छा समय 19 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक है। बताया जाता है कि इस समय हवन करने से पूरी नवरात्र का पुण्य मिलता है।

घर पर घट बिठाने की विधि यह बताई गई है। पहले दिन घर का ईशान कोना साफ करें और वहां गंगाजल छिड़कें। एक चौकी रखें, उस पर नया लाल कपड़ा बिछाएं और देवी की फोटो रखें। चौकी के सामने मिट्टी की एक परात रखें, उसमें थोड़ी मिट्टी डालें, ऊपर जौ डालें, फिर से थोड़ी मिट्टी डालें और थोड़ा पानी छिड़कें। नौ दिनों में यह जौ अच्छा उग आता है।

इसके बाद तांबे या पीतल का कलश लें। उसके गले में लाल धागा बांधें और कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं। कलश में साफ पानी भरें और गंगाजल मिलाएं। उसमें एक रुपये का सिक्का, सुपारी, थोड़े चावल, दूर्वा और हल्दी डालें। कलश के मुंह पर आम के 5 पत्ते रखें। एक नारियल लें, उस पर लाल कपड़ा लपेटें और कलश पर रखें। नारियल का मुंह अपनी तरफ रखें।

यह कलश जौ वाली परात के ठीक बीच में रखें। हाथ में पानी और फूल लेकर देवी से कहें कि आप नौ दिन उनकी पूजा करेंगे। फिर दीया और अगरबत्ती जलाएं। देवी को कुमकुम, चावल, फूल और फल चढ़ाएं। पहले दिन शैलपुत्री देवी की कथा पढ़ें।

नौ दिनों की देवियां इस तरह हैं: 11 अक्टूबर को शैलपुत्री, 12 को ब्रह्मचारिणी, 13 को चंद्रघंटा, 14 को कुष्मांडा, 15 को स्कंदमाता, 16 को कात्यायनी और 17 अक्टूबर को कालरात्रि। 18 अक्टूबर को महागौरी हैं, यानी अष्टमी। 19 अक्टूबर को सिद्धिदात्री हैं, यानी नवमी। 20 अक्टूबर को दशहरा और विसर्जन है। कहा गया है कि इन नौ दिनों में मन से देवी की पूजा करें तो घर में सुख, पैसा और सेहत आएगी।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे