सातरस्ता BIT चाल के 324 परिवार 13 साल से बेघर, संध्या दोषी ने पालिका में उठाया मुद्दा
शिवसेना (शिंदे गट) की नगरसेविका संध्या दोषी ने मुंबई महानगरपालिका की सभा में डेवलपरों और इस्टेट विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया। महापौर रितू तावडे ने सख्त जांच के आदेश दिए।
मुंबई महानगरपालिका की सभा में शिवसेना (शिंदे गट) की नगरसेविका संध्या दोषी ने सातरस्ता की BIT चाल के रुके हुए पुनर्विकास का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस्टेट विभाग (मालमत्ता विभाग) के अधिकारियों और डेवलपरों पर सीधा हमला बोला। उनका आरोप है कि डेवलपर आनंद विलायनूर और जैसल अजमेरा ने पालिका अधिकारियों से मिलीभगत करके 324 मराठी परिवारों को 13 साल से बेघर रखा और उनके साथ आर्थिक धोखाधड़ी की।
संध्या दोषी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर इन परिवारों को न्याय नहीं मिला तो आने वाले नवरात्रि में वे रहिवासियों के साथ उपोषण (भूख हड़ताल) पर बैठेंगी।
सभा में हरकत का मुद्दा उठाते हुए दोषी ने बताया कि BIT चाल क्रमांक 1 से 4 के पुनर्विकास का काम डेवलपर 'आनंद विल्लनूर' के पास है। यह प्रोजेक्ट 13 साल से अटका पड़ा है और 324 किरायेदारों को अब तक उनके हक के घर नहीं मिले। उनके मुताबिक डेवलपर ने इन किरायेदारों का 38 करोड़ रुपये का मासिक किराया और 15.7 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी डुबो दिया।
दोषी का कहना है कि सोसायटी को 4 हजार स्क्वेयर फीट जगह देने का वादा निभाया नहीं गया और 252 रहिवासियों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं हुआ। उनका आरोप है कि डेवलपर ने इस्टेट विभाग के अधिकारियों से मिलकर इमारत के नक्शे में गैरकानूनी बदलाव करवाए। LOI की मुदत 2013 से 2023 तक थी और वह खत्म हो चुकी थी, फिर भी अधिकारियों को अंधेरे में रखकर गैरकानूनी मंजूरी ले ली गई। दोषी ने यह भी कहा कि 7 मई 2025 को उच्च न्यायालय ने स्थगिती दी, इसके बावजूद प्रशासन ने डेवलपर का LOI रद्द नहीं किया।
दोषी के मुताबिक रहिवासियों की मंजूरी लिए बिना आनंद विल्लनूर ने 'अजमेरा' नाम के दूसरे डेवलपर के साथ गैरकानूनी जॉइंट वेंचर करार कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों डेवलपरों ने मिलकर पुनर्विकसित इमारत के 96 घर आपस में ही बेच दिए। दोषी ने यह भी बताया कि आनंद विल्लनूर पर वडाला की 'स्काय 31' इमारत के रहिवासियों ने 100 करोड़ के घोटाले को लेकर आर्थिक अपराध का मामला दर्ज कराया है और उच्च न्यायालय ने उसे 'वॉन्टेड' (फरार) घोषित किया है। ऐसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले डेवलपर को पालिका प्रशासन बचा रहा है, इस पर दोषी ने गुस्सा जताया।
दोषी ने कहा कि अपना हक मांगने वाले रहिवासियों पर झूठे FIR दर्ज किए जा रहे हैं। उनके नौकरी की जगह पर गलत जानकारी देकर उन्हें काम से निकलवाने की कोशिश की जा रही है। उनके शब्दों में बिल्डर की तरफ से यह नीच स्तर की राजनीति चल रही है।
दोषी ने प्रशासन को साफ कहा कि अगर इन 324 मराठी परिवारों को न्याय नहीं मिला और नवरात्रि में उन पर उपोषण की नौबत आई, तो वे खुद उनके साथ दालन के बाहर उपोषण पर बैठेंगी।
महापौर रितू तावडे ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन को इसकी गहरी जांच करके उचित कार्रवाई करने के सख्त आदेश दिए। महापौर ने यह निर्देश भी दिया कि जब तक इस मामले की पूरी रिपोर्ट सभा में पेश नहीं होती, तब तक संध्या दोषी का हरकत का मुद्दा रोक कर रखा जाए।