सातारा के भैरवनाथ मंदिर परिसर में काँक्रीट पर ठाकरे गुट का सवाल, ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग
सातारा के गडकर आली में भैरवनाथ मंदिर परिसर के कंक्रीटीकरण को लेकर शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने नगराध्यक्ष अमोल मोहिते को निवेदन दिया।
सातारा के गडकर गली में गांव के देवता माने जाने वाले श्री पेढ्या के भैरवनाथ मंदिर के परिसर में हुए विकासकाम को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने नगराध्यक्ष अमोल मोहिते को निवेदन देकर सीधा सवाल पूछा है कि जहां कुदरती पगडंडियां, मिट्टी और हरियाली थी, उस परिसर को काँक्रीट की जकड़ में क्यों लाया गया।
निवेदन में मांग की गई है कि मंदिर परिसर का तुरंत मौके पर जाकर मुआयना किया जाए और काँक्रीटीकरण के काम की तकनीकी और निष्पक्ष जांच हो।
शहरप्रमुख प्रणव सावंत की पहल पर गडकर गली के ग्रामीण और शिवसैनिक नगराध्यक्ष से मिले। उन्होंने काँक्रीटीकरण से पहले और बाद की तस्वीरें दिखाईं और दावा किया कि मंदिर परिसर का मूल कुदरती रूप बदल गया है। उनका सवाल था कि जब कुदरती पगडंडियां थीं, तो काँक्रीट डालने की जरूरत आखिर क्या थी।
इसके साथ यह भी मांग की गई कि बताया जाए कि इस काम का आराखडा यानी डिजाइन किसने तैयार किया, किन तकनीकी मानकों पर उसे मंजूरी मिली और किन विशेषज्ञों की सलाह ली गई।
निवेदन में कहा गया कि सार्वजनिक निधि से होने वाला काम सिर्फ देखने में अच्छा नहीं, बल्कि अच्छी क्वालिटी का और लंबे समय तक चलने वाला होना चाहिए। इसलिए अंदाजपत्रक, तकनीकी मंजूरी, इस्तेमाल हुआ सामान, काम की गुणवत्ता और संबंधित ठेकेदार की जिम्मेदारी की जांच की जाए। ग्रामीणों का रुख है कि अगर गड़बड़ी या घटिया काम मिले, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो और ठेकेदार को काली सूची में डाला जाए।
मंदिर परिसर में हुए वृक्षारोपण पर भी सवाल उठाए गए। मांग की गई कि कितने पेड़ लगाए गए, कितने जिंदा बचे और उनकी देखभाल पर कितना खर्च हुआ, इसका हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
इसके अलावा मंदिर की पवित्रता, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और परिसर में अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रशासन से ठोस उपाय करने की मांग भी की गई। ग्रामीणों ने गुस्से में कहा, "विकास के नाम पर श्रद्धास्थान का कुदरती वजूद ही खत्म नहीं होना चाहिए।"