रॉयल एनफील्ड हिमालयन 450 के साथ लद्दाख के मुश्किल ऑफ-रोड रास्तों का अनुभव
लेह के पास चुचोट ग्राउंड्स से शुरू हुई 'लद्दाख अनचार्टेड' राइड में हिमालयन 450 ने पथरीले, रेतीले और पानी वाले रास्तों पर टेस्ट पास किया।
लद्दाख का नाम आते ही ऊंचे पहाड़, घुमावदार रास्ते और यादगार बाइक राइड का ख्याल आता है। आजकल लद्दाख के कई मुख्य रूट पर अच्छी डामर रोड बन गई हैं, लेकिन असली एडवेंचर तो तब है जब मुख्य सड़क छोड़कर पथरीले और रेगिस्तानी ट्रेल पर निकला जाए। ऐसे ही अनुभव के लिए रॉयल एनफील्ड ने हिमालयन बेसकैंप के दौरान 'लद्दाख अनचार्टेड' नाम से एक ऑफ-रोड राइड आयोजित की।
इस राइड की शुरुआत लेह के पास चुचोट ग्राउंड्स से हुई। आगे बढ़ते हुए संकरे ट्रेल, पथरीली चढ़ाई और नहर के किनारे-किनारे जाने वाले रास्ते पार करने पड़े। कहीं-कहीं रेत, सख्त गोटे और बड़े-बड़े पत्थरों का मिला-जुला भूभाग सामने आया। इसके अलावा छोटे-छोटे पानी के बहाव वाले हिस्सों से भी हिमालयन 450 को निकालना पड़ा। इस तरह की मुश्किल परिस्थिति में राइडर की बॉडी पोजिशन, थ्रॉटल कंट्रोल और सही लाइन चुनना उतना ही जरूरी हो जाता है।
इस खतरनाक और मुश्किल ट्रेल पर हिमालयन 450 का 450cc इंजन बड़े काम आया, खासकर उसका मिड-रेंज टॉर्क। कठिन चढ़ाई पर बार-बार क्लच दबाने की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि कंट्रोल्ड थ्रॉटल के सहारे ही बाइक आगे बढ़ती रही। रास्ते में आए गड्ढों, पत्थरों और गहरी लीक वाली जगहों पर बाइक का सस्पेंशन भी असरदार साबित हुआ। गोटों पर एक पल के लिए बाइक का पिछला हिस्सा फिसला भी, लेकिन थ्रॉटल और सही कंट्रोल से उसे फिर से संभाल लिया गया।
हालांकि हिमालयन 450 एक सक्षम बाइक है, फिर भी यह हल्की एंड्यूरो बाइक नहीं है। इसलिए बहुत ज्यादा ढीली सतह या संकरी पथरीली ढलान पर इसका वजन महसूस होता है। ऐसे में इस तरह की राइड के लिए राइडिंग स्किल के साथ-साथ शारीरिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। लद्दाख की ऊंचाई के हिसाब से खुद को ढालना भी बहुत जरूरी माना गया है। इस अनुभव से यह साफ हुआ कि लेह पहुंचने के बाद शुरुआती 24 घंटे शरीर को आराम देना और एक्लिमेटाइजेशन पर ध्यान देना कितना जरूरी है।