बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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21:13 IST

रणवीर शौरी बोले, ताकत सड़क पर नहीं, संसद और मतपेटी में दिखाइए

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले आंदोलन पर अभिनेता रणवीर शौरी ने एक्स पर अपनी राय रखी है, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी।

रणवीर शौरी बोले, ताकत सड़क पर नहीं, संसद और मतपेटी में दिखाइए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दिल्ली में चल रहे एक राजनीतिक आंदोलन की वजह से माहौल गरमाया हुआ है और अब इस पर बॉलीवुड में भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे CJP के आंदोलन पर अभिनेता रणवीर शौरी ने अपनी बात खुलकर रखी है।

रणवीर का कहना है कि आंदोलन करने वालों को सड़क पर उतरने के बजाय अदालतों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर जोरदार चर्चा शुरू हो गई है।

रणवीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो के जवाब में आंदोलन के तरीके पर सवाल उठाए। उस वीडियो में लोगों से सड़क पर उतरकर आंदोलन जारी रखने की अपील की गई थी। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए रणवीर ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की संस्थाओं का सहारा लेने की बात कही।

अपनी पोस्ट में रणवीर ने लिखा, "अपनी ताकत संसद और मतपेटी में दिखाइए, सड़कों पर नहीं! और अगर वहां तक पहुंचने का रास्ता आपको गलत लगता है, तो अदालत जाइए! यही लोकतांत्रिक तरीका है!"

इसके आगे उन्होंने उन आंदोलनों पर भी ऐतराज जताया जो सार्वजनिक बुनियादी सुविधाओं और कानून-व्यवस्था पर असर डालते हैं। रणवीर के मुताबिक सड़कों पर कब्जा करके और सार्वजनिक सुविधाओं व कानून-व्यवस्था की मशीनरी को बंधक बनाकर रखना ही असल में "लोकतंत्र की हत्या" है।

बताया जा रहा है कि इस आंदोलन के बीच कुछ बॉलीवुड कलाकारों ने प्रशासन के आंदोलनों से निपटने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। कहा जा रहा है कि हुमा कुरेशी, सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा समेत कुछ कलाकारों ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ऐसे में रणवीर शौरी का रुख खास तौर पर चर्चा में आ गया है।

आंदोलन करने का अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था, इन दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, इस पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

रणवीर के बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दिख रही हैं। कुछ यूजर उनकी बात का समर्थन कर रहे हैं और आंदोलनों से आम लोगों को होने वाली परेशानी की तरफ ध्यान दिला रहे हैं। वहीं कुछ लोग आंदोलन के अधिकार और लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने की अहमियत पर जोर दे रहे हैं।

एक तरफ चुनाव आयोग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग है और दूसरी तरफ आंदोलन के तरीके को लेकर शुरू हुई बहस, इन दोनों वजहों से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस पूरे मामले में अलग-अलग पार्टियों का रुख और आंदोलन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी देखकर ही किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक रहेगा।

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