राजेंद्र लोढा ईडी अरेस्ट केस: हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, पीएमएलए कस्टडी रद्द
लोढा डेव्हलपर्स के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र लोढा की गिरफ्तारी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सवाल उठाए, जमानत मंजूर।
लोढा डेव्हलपर्स के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र नरपतमल लोढा की गिरफ्तारी को लेकर मुंबई हाईकोर्ट के एक अहम आदेश के बाद इस केस में ईडी की जांच फिर से चर्चा में आ गई है। जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच ने 21 सितंबर 2026 को कहा कि लोढा की पीएमएलए के तहत हुई गिरफ्तारी की प्रोसेस में कानूनी खामियां हैं। कोर्ट ने उनकी कस्टडी रद्द करते हुए 5 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी।
इस केस में ईडी ने पहले कोर्ट से पीएमएलए की धारा 50 के तहत लोढा से पूछताछ करने और मौजूदा दस्तावेजों के आधार पर उनका बयान दर्ज करने की परमिशन मांगी थी। स्पेशल कोर्ट ने यह मांग मंजूर भी कर दी थी। लेकिन यह प्रोसेस पूरी किए बिना उसी उपलब्ध सामग्री के आधार पर गिरफ्तारी करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में गिरफ्तारी के अधिकार का इस्तेमाल 'colourable exercise of power' माना जाएगा।
अब सवाल उठता है कि विनोद पाटील की पूछताछ क्यों हुई थी? असल में, राजेंद्र लोढा से जुड़े इसी केस की जांच में नवंबर 2025 में ईडी ने मुंबई और आसपास के 14 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। इनमें विनोद पाटील से जुड़ी एक जगह भी शामिल थी। मिली जानकारी के मुताबिक, लोढा और पाटील के बीच हुए जमीन और आर्थिक लेनदेन से जुड़ी जानकारी ईडी ने खंगाली थी।
मुंबई पुलिस की मूल एफआईआर में राजेंद्र लोढा, उनके बेटे साहिल और कुछ अन्य लोगों के साथ विनोद पाटील का नाम भी शामिल था। एफआईआर में आरोप है कि लोढा डेव्हलपर्स की प्रॉपर्टी को कम कीमत में बेचकर कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। ये आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं और अभी साबित नहीं हुए हैं।
ईडी ने मार्च 2026 में जारी अपने आधिकारिक बयान में बताया था कि इस केस में राजेंद्र लोढा और अन्य के खिलाफ जांच जारी है। 26 मार्च को करीब 271.48 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की गई थी। उस वक्त ईडी ने कहा था कि इस केस में कुल जब्ती/अटैचमेंट का आंकड़ा करीब 359.48 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
हाईकोर्ट के आदेश की सबसे बड़ी बात राजेंद्र लोढा की गिरफ्तारी की कानूनी वैधता और ईडी की अपनाई गई प्रोसेस को लेकर है। कोर्ट ने अभी इस स्टेज पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप सही हैं या गलत, इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। आरोपों की सच्चाई अलग से कोर्ट की सुनवाई में जांची जाएगी।
इसलिए हाईकोर्ट ने लोढा की गिरफ्तारी रद्द कर दी, इसका यह मतलब नहीं निकाला जा सकता कि विनोद पाटील की पहले हुई पूछताछ अपने आप गैरकानूनी हो गई। लेकिन लोढा की गिरफ्तारी की प्रोसेस पर कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद पाटील की पूछताछ को लेकर राजनीतिक हलकों में फिर से चर्चा शुरू होना एक अलग मुद्दा है।