राहुल गांधी के फोन के बाद राहुल बोंद्रे का भाजप प्रवेश टला, यशोमती ठाकूर का दावा
बुलढाणा के चिखली के पूर्व विधायक राहुल बोंद्रे ने भाजप में जाने का फैसला बदलकर कांग्रेस में ही रहने का निर्णय लिया।
बुलढाणा जिले में कांग्रेस को बड़ा झटका लगने की नौबत आ गई थी, वो भी प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ के अपने जिले में। दरअसल बुलढाणा के चिखली विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस के पूर्व विधायक राहुल बोंद्रे को लेकर चर्चा तेज हो गई थी कि वो भाजप में शामिल होने वाले हैं। बोंद्रे ने फेसबुक लाइव पर आकर भाजप में जाने का ऐलान भी कर दिया था। लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने अपना फैसला पलट दिया और कांग्रेस में ही बने रहने का निर्णय लिया।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक फोन कॉल की अहम भूमिका बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने बोंद्रे से फोन पर बात कर उन्हें समझाया, जिसके बाद बोंद्रे ने कांग्रेस के साथ ही रहने का फैसला किया।
इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता यशोमती ठाकूर ने प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था, "राहुल गांधी कार्यकर्ताओं का ख्याल रखने वाले नेता हैं। राहुल बोंद्रे पर कितना दबाव रहा होगा, यह उनके चेहरे से ही पता चलता है।"
यशोमती ठाकूर ने आगे यह भी आरोप लगाया कि राहुल बोंद्रे की संस्थाओं पर सरकार की ओर से कार्रवाई या दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "राहुल बोंद्रे की संस्थाओं को बरबाद करने पर मौजूदा सरकार तुली हुई है।" यह उनका राजनीतिक आरोप है।
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने बोंद्रे को पार्टी में उनके काम की याद दिलाते हुए फैसले पर फिर से सोचने की अपील की। दावा है कि राहुल गांधी ने उनसे कहा, "आपने पार्टी के लिए अच्छा काम किया है, आप निष्ठावान हैं, पार्टी को आपकी जरूरत है, आप अपने फैसले पर दोबारा विचार करें।"
यशोमती ठाकूर के मुताबिक राहुल गांधी के फोन के बाद बोंद्रे को हिम्मत मिली। उन्होंने बताया कि इसके बाद बोंद्रे ने राहुल गांधी से यह वादा किया, "मेरा सब कुछ चला जाए तब भी मैं कांग्रेस और आपके लिए काम करूंगा।"
राहुल बोंद्रे चिखली विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुके हैं। फिलहाल इस सीट से भाजप की श्वेता महाले विधायक हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद बुलढाणा की कांग्रेस राजनीति में बोंद्रे की भूमिका को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।