पुणे में बड़े प्रोजेक्ट ठीक, पर पानी, सड़क, स्कूल और अस्पताल पर ध्यान जरूरी: अमोल बालवडकर
राष्ट्रवादी कांग्रेस के नगरसेवक अमोल बालवडकर ने पुणे में नवभारत के दफ्तर में बुनियादी सुविधाओं, स्कूल, अस्पताल और हादसों में मुआवजे पर अपनी बात रखी।
पुणे शहर के विकास की प्राथमिकताएं तय करते वक्त बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के साथ-साथ हेल्थ, एजुकेशन, पीने का पानी, सड़क और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। यह बात राष्ट्रवादी कांग्रेस के नगरसेवक अमोल बालवडकर ने कही। गुरुवार को वे पुणे में नवभारत समूह के दफ्तर आए थे, वहीं उन्होंने अपनी बात रखी।
बालवडकर के मुताबिक नदी सुधार प्रोजेक्ट, फ्लाईओवर, रिंग रोड और मेट्रो जैसे बड़े काम ऊपर के स्तर से आगे बढ़ जाएंगे। लेकिन स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतें सुलझाना स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
महापालिका की एजुकेशन व्यवस्था पर उन्होंने सवाल उठाए। बालवडकर ने कहा कि सिर्फ स्कूल की बिल्डिंग रंग देना या डिजिटल बोर्ड और स्क्रीन लगा देना अच्छी पढ़ाई की व्यवस्था बनाना नहीं है। महापालिका के स्कूलों में जरूरी स्टाफ और बुनियादी इंतजाम मुहैया कराने की जरूरत है। स्कूल अलग-अलग संस्थाओं को चलाने के लिए देने की प्रक्रिया से एजुकेशन का निजीकरण हो रहा है, ऐसा आरोप भी उन्होंने लगाया।
RTE एडमिशन को लेकर उन्होंने कहा कि पैरेंट्स को परेशानी झेलनी पड़ती है। उनका आरोप है कि लोकेशन या कागजात की गलतियां दिखाकर पैसे मांगे जाते हैं। उन्होंने इन आरोपों की अलग से जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। बालवडकर ने यह भी बताया कि RTE के तहत आठवीं तक मुफ्त पढ़ाई का प्रावधान है, मगर नौवीं और दसवीं की बढ़ती फीस की वजह से कमजोर आर्थिक हालत वाले परिवारों के बच्चों, खासकर लड़कियों, के लिए आगे पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
हादसों में जिम्मेदारी तय होने की बात भी उन्होंने उठाई। गड्ढे, खुली ड्रेनेज लाइन, मैनहोल, बिजली के खंभे या पेड़ों की खतरनाक डालियों से होने वाले हादसों में लोगों को पैसों का भी और शरीर का भी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे मामलों में महापालिका की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, यह उन्होंने कहा।
उन्होंने खडकी के एक हादसे का उदाहरण दिया। हाथ के ऊपर से बस गुजर जाने के बाद एक साइकिल सवार के इलाज का खर्च करीब 12 लाख रुपये बताया गया। पैसों की तंगी की वजह से आखिर उसका हाथ काटना पड़ा। बालवडकर ने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों को इंश्योरेंस क्लेम दिलाने में तुरंत मदद करनी चाहिए। उनके मुताबिक उन्होंने प्रस्ताव रखा है कि हादसे के घायलों को पांच लाख रुपये और मरने वालों के वारिसों को दस लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। PMPML या महापालिका की गाड़ियों से हुए हादसों के इंश्योरेंस क्लेम के लिए अलग नोडल अफसर नियुक्त करने की मांग भी उन्होंने की।
महापालिका की हेल्थ व्यवस्था पर भी उन्होंने बात की। बालवडकर ने कहा कि पुणे के महापालिका अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है और ससून और कमला नेहरू जैसे गिने-चुने अस्पतालों पर मरीजों की देखभाल का बड़ा बोझ है। आम महिलाओं के लिए अलग और आधुनिक प्रसूति अस्पताल की जरूरत बताते हुए उन्होंने प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी का बढ़ता खर्च सामने रखा। नवजात बच्चों के लिए जरूरी NICU की सुविधाओं की भी कमी है, ऐसा उनका दावा है।
उनसे पूछा गया कि महायुति की सरकार होते हुए भी महापालिका में आक्रामक रुख क्यों अपनाया जाता है। इस पर बालवडकर ने कहा कि लोगों के सवालों के लिए सभा में आवाज उठाना विपक्ष का फर्ज है। गलत फैसलों पर सवाल उठाए जाएं तो उसे राजनीतिक गठबंधन का हवाला देकर टालना नहीं चाहिए, यह भी उन्होंने कहा।
वार्ड का फंड रोके जाने के सवाल पर बालवडकर ने बताया कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार से उनकी चर्चा हुई है। फंड देने का आश्वासन मिला है और चंद्रकांत पाटील के साथ बात करके यह मामला सुलझाने की बात तय हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि महायुति में तालमेल है, फिर भी स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं होती हैं। बालवडकर ने साफ किया कि वे कोथरूड विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।