पिठोरी अमावस्या: मां और बच्चों की सलामती के लिए व्रत, जानें त्योहार की खासियत
श्रावण महीने के आखिरी दिन आने वाली इस अमावस्या पर मांएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सेहत के लिए व्रत रखती हैं।
गणपति बप्पा के आने में अब बस चंद दिन बचे हैं, और उससे पहले श्रावण महीने के आखिरी दिन आती है पिठोरी अमावस्या। इस दिन को मातृ दिन के तौर पर भी मनाया जाता है, यानी मांओं का खास दिन। इस मौके पर मांएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना करते हुए व्रत रखती हैं।
'पिठोरी' शब्द का मतलब है आटे यानी पिठे से बनाई गई मूर्तियां। इस दिन पिठे से चौसठ योगिनियों और सप्तमातृकाओं की मूर्तियां बनाकर उनकी विधिवत पूजा की जाती है। इसके साथ ही परिवार की वंशवृद्धि और बच्चों की रक्षा के लिए भी प्रार्थना की जाती है। पिठोरी अमावस्या खासकर गांवों और देहात इलाकों में ज्यादा धूमधाम से मनाई जाती है।
इस दिन जिन देवियों की पूजा होती है उनमें ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी और चामुंडा शामिल हैं। यही वजह है कि इस त्योहार पर लोग एक-दूसरे को खासकर अपने रिश्तेदारों और परिवार को शुभकामना संदेश भेजकर खुशी जाहिर करते हैं।
अगर आप भी अपनों को पिठोरी अमावस्या की बधाई देना चाहते हैं तो कुछ ऐसे संदेश भेज सकते हैं। जैसे- "मां ही हमारी पहली गुरु है, तुझसे ही हमारा वजूद शुरू होता है। पिठोरी अमावस्या और मातृ दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं! बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और लंबी उम्र के लिए व्रत रखने वाली सभी मांओं को दिल से बधाई। मां पार्वती की कृपा से आपके घर में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहे।"
एक और संदेश इस तरह भेजा जा सकता है- "मां यानी ममता का खजाना, मां यानी अमृत जैसी मिठास, मां यानी बारिश की नमी, मां यानी सुकून की ठंडक। पिठोरी अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं!" इसी तरह चौसठ योगिनियों की कृपा से घर में सुख, समृद्धि और सेहत बनी रहने की कामना करते हुए भी संदेश भेजे जा सकते हैं।
कठिन वक्त में भी बच्चों के साथ डटकर खड़ी रहने वाली सभी मांओं को इस मौके पर सलाम करने की परंपरा भी है। श्रावण की इस पवित्र अमावस्या पर लोग एक-दूसरे के घर से दुख-दर्द दूर होने और सुख-समृद्धि की नई रोशनी आने की दुआ भी मांगते हैं।