फडणवीस का दावा: गढ़चिरौली से शुरू होगी देश की क्लीन ग्रीन स्टील क्रांति, विदर्भ बनेगा माइनिंग हब
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में माइनिंग इंजीनियरों के सम्मेलन में विदर्भ में निवेश और स्टील उत्पादन की योजनाओं का ऐलान किया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि विदर्भ में माइनिंग के जरिए भारत की आर्थिक तरक्की का बड़ा इंजन बनने का पूरा दम है। उनके मुताबिक यह इलाका 'विकसित भारत 2047' के विजन में बड़ा योगदान दे सकता है। फडणवीस ने बताया कि गढ़चिरौली में माइनिंग सेक्टर में एक नया इकोसिस्टम आकार ले रहा है, जिससे देश में पहली बार 'क्लीन ग्रीन स्टील क्रांति' की शुरुआत हो रही है।
मुख्यमंत्री यह बात 'द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया)' के नागपुर लोकल सेंटर की तरफ से आयोजित माइनिंग इंजीनियर्स के दो-दिवसीय 36वें राष्ट्रीय सम्मेलन और 'माइनिंग फॉर विकसित भारत 2047' पर हुए राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। इस मौके पर उन्होंने माइनिंग सेक्टर की नई रिसर्च दिखाने वाली एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।
गढ़चिरौली में आयरन ओर यानी लौह अयस्क के भंडार का हवाला देते हुए फडणवीस ने बताया कि इस इलाके में करीब 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश आ रहा है और लगभग 50 एमटीपीए यानी मिलियन टन प्रति वर्ष की स्टील उत्पादन क्षमता खड़ी की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि एक नए राष्ट्रीय मिशन के तहत देश भर में प्रस्तावित आठ कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स में से चार विदर्भ के हिस्से आए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़चिरौली के साथ-साथ चंद्रपुर, भंडारा, नागपुर, गोंदिया और यवतमाल जिलों में भी नया इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम खड़ा किया जा सकता है। ग्रीन स्टील, क्लीन टेक्नोलॉजी और अच्छी लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी से इलाके में बड़े पैमाने पर रोजगार और आर्थिक मौके बनेंगे।
आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. संदीप शिरखेड़कर ने अपने भाषण में माइनिंग सेक्टर की मुख्य दिक्कतों पर बात की। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स, आधुनिक टेक्नोलॉजी और माइन क्लोजर प्रोसेस पर गहरी चर्चा की जरूरत है, साथ ही ट्रेनिंग सेंटर, आर्बिट्रेशन सुविधाएं और टेस्टिंग लैब भी खड़ी करनी होंगी। उन्होंने बताया कि द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के तहत देश भर में 4,000 से ज्यादा माइनिंग इंजीनियरों का नेटवर्क है, जिसमें नागपुर के करीब 300 इंजीनियर भी शामिल हैं, और महाराष्ट्र सरकार व वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी डब्ल्यूसीएल को इस काम में संस्थान का पूरा साथ मिलेगा।
सम्मेलन के संयोजक डॉ. अनुपम खेर ने कहा कि 'माइनिंग फॉर विकसित भारत 2047' सिर्फ एक विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रेरणा है, और कोयला, आयरन ओर, लाइमस्टोन के साथ लिथियम-ग्रेफाइट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी और सुरक्षा का संतुलन बनाना जरूरी है।
माइनिंग डिवीजन बोर्ड के चेयरमैन सुरेश चंद्र सुमन ने कहा कि एआई, ऑटोमेशन, ड्रोन, सेंसर और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से माइनिंग ज्यादा सुरक्षित और सस्टेनेबल बनेगी, और प्रोडक्शन टारगेट से पहले वर्कर की सुरक्षा को तरजीह दी जानी चाहिए। डब्ल्यूसीएल के सीएमडी डॉ. हेमंत शरद पांडे ने बताया कि यह कन्वेंशन नागपुर को देश की 'माइनिंग कैपिटल' बनाने के मकसद से रखा गया था और डब्ल्यूसीएल ने 12 खदानों में 18 जरूरी मिनरल्स व रेयर अर्थ एलिमेंट्स की पहचान कर ली है। उन्होंने माजरी में प्रस्तावित कोल गैसीफिकेशन हब का जिक्र करते हुए 'मेक इन इंडिया', पीएलआई स्कीम, 'स्टार्टअप इंडिया' और 'स्किल इंडिया' जैसी पहलों का भी हवाला दिया, साथ ही बताया कि डब्ल्यूसीएल पानी बचाने, पर्यावरण और इको-टूरिज्म पर भी काफी ध्यान दे रहा है।