पलाऊ में अमेरिका के बड़े सैन्य निर्माण से स्थानीय लोगों में डर, समुद्री जीवन पर भी खतरा
प्रशांत महासागर के छोटे से देश पलाऊ में अमेरिका बंदरगाह, रडार और रनवे का विस्तार कर रहा है, जिससे भविष्य में संघर्ष की सूरत में यह देश निशाने पर आ सकता है।
प्रशांत महासागर के बीचोबीच बसा छोटा सा देश पलाऊ अपने नीले पानी, प्रवाल भित्तियों और समृद्ध समुद्री जैवविविधता के लिए जाना जाता है। मगर अब यह देश किसी और वजह से चर्चा में है, वजह है अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियां। अमेरिका यहां बंदरगाह का विस्तार, सैन्य रडार और दूसरे ढांचागत काम करवा रहा है। इस वजह से स्थानीय लोगों में यह डर बैठ गया है कि आगे चलकर किसी संघर्ष में यह छोटा सा द्वीप देश निशाने पर आ सकता है।
पलाऊ के मुख्य बंदरगाह को फिर से बनाने के लिए अमेरिका करीब ५०० मिलियन डॉलर की रकम लगा रहा है। योजना यह है कि बंदरगाह को और गहरा किया जाए ताकि वहां बड़े नौसैनिक जहाज भी आ सकें। इसके साथ ही रडार सिस्टम और सैन्य इस्तेमाल के लिए रनवे बढ़ाने जैसे कई और प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं।
अमेरिका का कहना है कि इन सुविधाओं से इलाके की सुरक्षा और लॉजिस्टिक क्षमता मजबूत होगी। लेकिन स्थानीय लोग इस बढ़ती सैन्य मौजूदगी को अलग नजरिए से देख रहे हैं, उनके मन में यह सवाल है कि आखिर इसका असर उनकी जिंदगी पर क्या पड़ेगा।
पलाऊ का इतिहास दूसरे विश्व युद्ध की भीषण यादों से जुड़ा है। यही वजह है कि आने वाले वक्त में अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों के बीच अगर कोई टकराव होता है, तो पलाऊ अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से मुश्किल में फंस सकता है, ऐसी आशंका वहां के लोगों में है।
पलाऊ की आबादी वैसे भी कम है और देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन और समुद्री पर्यावरण पर टिकी है। इसीलिए अगर युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।
इन सैन्य प्रोजेक्ट्स की वजह से पर्यावरण को लेकर भी चिंता बढ़ी है। पलाऊ के समुद्र में दुर्लभ डुगोंग यानी समुद्री गाय के अलावा तरह-तरह की प्रवाल भित्तियां और समुद्री जीव रहते हैं। बंदरगाह के लिए होने वाली ड्रेजिंग और निर्माण से इन प्रवाल भित्तियों और डुगोंग के रहने की जगह पर असर पड़ सकता है।
यानी पलाऊ के सामने अब दोहरी चुनौती है, एक तरफ सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ नाजुक समुद्री पर्यावरण को बचाए रखने की जिम्मेदारी।