गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:04 IST

पाकिस्तान में सिख छात्र ओंकार सिंह की मैट्रिक में शानदार कामयाबी, SGPC देगी 51 हजार रुपये इनाम

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहने वाले सिख छात्र ओंकार सिंह ने लाहौर बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में दूसरा नंबर हासिल किया है। भारत की SGPC ने उसे 51 हजार रुपये का नकद इनाम देने का फैसला लिया है।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहने वाला एक सिख छात्र इन दिनों अपनी पढ़ाई की वजह से चर्चा में है। ओंकार सिंह नाम के इस स्टूडेंट ने पाकिस्तान की मैट्रिक यानी 10वीं की परीक्षा में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अपने समुदाय का नाम रोशन किया है। लाहौर बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एंड सेकेंडरी एजुकेशन की सालाना मैट्रिक परीक्षा में ओंकार ने दूसरा नंबर हासिल किया। उसकी इस कामयाबी को देखते हुए भारत की शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक समिति यानी SGPC ने उसे 51,000 रुपये का नकद इनाम देकर सम्मानित करने का फैसला किया है।

ओंकार सिंह की यह अच्छी परफॉर्मेंस कोई नई बात नहीं है। इससे पहले 9वीं क्लास की परीक्षा में भी उसने बोर्ड में दूसरा नंबर पाया था और सभी विषयों में A+ ग्रेड लिया था। उस परीक्षा में उसे इस्लामियात में 100 में से 98 नंबर, कुरआन के अनुवाद में 50 में से 49 नंबर, इंग्लिश में 75 में से पूरे 75 नंबर, उर्दू में 75 में से 74 नंबर, फिजिक्स और केमिस्ट्री में 60 में से पूरे 60 नंबर और बायोलॉजी में 60 में से 59 नंबर मिले थे। इसी लगातार अच्छी पढ़ाई के दम पर उसने इस बार 10वीं यानी मैट्रिक की परीक्षा में भी लाहौर बोर्ड में दूसरा नंबर हासिल किया है।

SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने बताया कि SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की सलाह पर कार्यकारी समिति की मीटिंग में ओंकार सिंह को 51,000 रुपये का नकद इनाम देने का फैसला लिया गया। मन्नन ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक सिख समुदाय से आने वाले ओंकार की यह कामयाबी बहुत मायने रखती है।

ओंकार सिंह के पिता डॉ. मिमपाल सिंह पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति यानी PSGPC के मेंबर हैं और मेडिकल व एजुकेशन फील्ड में काम करते हैं। SGPC के मुताबिक डॉ. मिमपाल सिंह को पाकिस्तान का पहला सिख डॉक्टर माना जाता है। उनकी इस खास सर्विस के लिए पाकिस्तान सरकार ने उन्हें तमगा-ए-इम्तियाज नाम के सिविल अवॉर्ड से नवाजा है।

SGPC ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय से होते हुए भी ओंकार ने सिर्फ अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है, जो पूरे सिख समुदाय के लिए गर्व की बात है।

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