पैट्रियट डे: 9/11 हमले के शहीदों की याद में अमेरिका में यह दिन क्यों मनाया जाता है
11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले में जान गंवाने वालों की याद में अमेरिका में हर साल मनाया जाता है 'पैट्रियट डे', जानिए इसका इतिहास और महत्व
11 सितंबर 2001 की तारीख दुनिया के इतिहास में, खासकर अमेरिका के लिए, कभी न मिटने वाला काला दिन बन गई थी। इसी दिन अल-कायदा के आतंकवादियों ने अमेरिका में चार विमान हाईजैक करके दुनिया के सबसे ताकतवर देश पर भीषण हमला बोला था।
न्यू यॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टॉवर्स, वॉशिंग्टन के पेंटागॉन और पेनसिल्वेनिया के एक खेत में हुए इन हमलों में करीब 3,000 बेगुनाह लोगों की जान गई थी। इस भीषण हादसे और उसके बाद चले रेस्क्यू ऑपरेशन में हजारों आम नागरिकों के साथ-साथ सैकड़ों फायर फाइटर्स, पुलिस अफसर और इमरजेंसी मेडिकल टीम के जवान भी शहीद हुए थे। इन्हीं शहीदों और मासूम मृतकों की याद में हर साल 11 सितंबर को पूरे अमेरिका में 'पैट्रियट डे' या 'नेशनल डे ऑफ सर्विस एंड रिमेंबरेंस' मनाया जाता है।
इस दिन पूरे अमेरिका में माहौल बेहद गंभीर और भावुक रहता है। अमेरिकी कांग्रेस के नियमों के मुताबिक, राष्ट्रपति के आदेश पर व्हाइट हाउस, सभी सरकारी इमारतों, मिलिट्री बेस और दुनियाभर में अमेरिकी दूतावासों पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक राष्ट्रध्वज आधा झुका रहता है। आम नागरिकों से भी अपने घरों पर झंडा आधा फहराने की अपील की जाती है। सुबह ठीक 8:46 बजे (ईस्टर्न टाइम के मुताबिक) पूरे अमेरिका में दो मिनट का मौन रखा जाता है, क्योंकि यही वह वक्त था जब पहला हाईजैक किया गया विमान, अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 11, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टॉवर से टकराया था। इस मौन के जरिए पूरा देश हमले में मारे गए मासूम लोगों की आत्मा की शांति के लिए दुआ करता है।
2001 की इस घटना के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में कांग्रेस ने 18 दिसंबर 2001 को बिल पास कर 11 सितंबर को 'पैट्रियट डे' घोषित किया था। इसके बाद 2009 में अमेरिकी सरकार ने इस दिन को 'नेशनल डे ऑफ सर्विस एंड रिमेंबरेंस' के साथ भी जोड़ दिया। यही वजह है कि यह दिन अब सिर्फ गम मनाने का दिन नहीं रहा, बल्कि एक-दूसरे की मदद करने का दिन बन गया है। इस दिन लाखों अमेरिकी नागरिक ब्लड डोनेशन करते हैं, गरीबों को खाना बांटते हैं, इलाके की सफाई करते हैं और शहीदों के परिवारों को आर्थिक व मानसिक सहारा देते हैं।
न्यू यॉर्क के 'नेशनल सितंबर 11 मेमोरियल एंड म्यूजियम', पेंटागॉन मेमोरियल और पेनसिल्वेनिया के 'फ्लाइट 93 मेमोरियल' पर हर साल खास कार्यक्रम होते हैं, जहां हमले में मारे गए हर नागरिक का नाम पढ़ा जाता है। रात में न्यू यॉर्क के आसमान में दो बड़े लाइट बीम (ट्रिब्यूट इन लाइट) छोड़े जाते हैं, जो ढह चुकी ट्विन टॉवर्स की याद दिलाते हैं। मोमबत्तियां जलाकर, फूल चढ़ाकर और भावुक गाने गाकर शहीदों के साहस को सलाम किया जाता है।
'पैट्रियट डे' दुनिया को यह पैगाम देता है कि आतंकवाद चाहे जितना खौफनाक हो, वह इंसानी हिम्मत, प्यार और एकता को कभी खत्म नहीं कर सकता। 11 सितंबर 2001 को जब अमेरिका हिल गया था, तब दुनिया ने अमेरिकी जनता में पहले कभी न देखी गई एकता देखी थी। फायर फाइटर्स ने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाई थी। यह दिन सिखाता है कि नफरत का जवाब नफरत से नहीं, बल्कि शांति, भाईचारे और अटूट हिम्मत से दिया जाना चाहिए। अमेरिका के लिए यह दिन सिर्फ इतिहास के एक जख्म की याद नहीं, बल्कि देश की हिफाजत के लिए तैयार हर जवान और हर नागरिक को दी गई सलामी है।