ओबीसी महासंघ की चेतावनी: आरक्षण को नुकसान पहुंचा तो हम भी सड़क पर उतरेंगे
जरांगे पाटील के मुंबई आंदोलन की इजाजत देने या न देने पर सरकार क्या रुख अपनाती है, इस पर राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष डॉ. बबनराव तायवाडे ने नजर रखने की बात कही है
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मनोज जरांगे पाटील को उनके प्रस्तावित आंदोलन की परमिशन मिलेगी या नहीं, इस पर अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। इससे पहले भी प्रशासन ने पुलिस की मदद से बिना परमिशन के होने वाले कई आंदोलनों को सफलतापूर्वक रोक दिया था। इसी बात को याद दिलाते हुए राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष डॉ. बबनराव तायवाडे ने कहा कि जरांगे पाटील और सरकार, दोनों की भूमिका पर उनकी नजर बनी हुई है।
तायवाडे ने कहा कि अगर मनोज जरांगे पाटील मुंबई जाने का फैसला लेते हैं, तो सरकार आखिर क्या रुख अपनाती है, यह देखना जरूरी होगा। सरकार के इस रवैये से कहीं ओबीसी आरक्षण को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचता, इस पर भी उनकी पैनी नजर रहेगी। उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार का रवैया ओबीसी आरक्षण को धक्का पहुंचाने वाला निकला, तो 60 प्रतिशत ओबीसी बिरादरी के साथ मिलकर वे भी सड़क पर उतरकर आंदोलन छेड़ देंगे।
तायवाडे ने यह भी याद दिलाया कि प्रशासन पुलिस और दूसरी एजेंसियों की मदद से बिना परमिशन वाले आंदोलनों को रोक दिखाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि जरांगे पाटील के प्रस्तावित मुंबई आंदोलन को लेकर कोर्ट ने अभी तक कोई ठोस भूमिका इसलिए नहीं ली है, क्योंकि जरांगे पाटील ने अभी तक बाकायदा मुंबई जाने का ऐलान नहीं किया है। ऐलान होने के बाद प्रशासन सच में परमिशन देता है या नहीं, यही असली सवाल होगा।
ओबीसी नेता लक्ष्मण हाके पर हुए कथित हमले को लेकर पूछे जाने पर तायवाडे ने कहा कि यह घटना निंदनीय है, लेकिन इस बारे में अभी तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है, इसलिए इस पर ज्यादा बोलना ठीक नहीं होगा।
उधर, मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे पाटील के मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन पर हाई कोर्ट ने कहा है कि वे जरांगे पाटील को मुंबई आने से नहीं रोक सकते। कोर्ट ने कहा कि पिछले साल की घटनाओं का हवाला देकर इस बार उन्हें रोका नहीं जा सकता, क्योंकि यह लोकतंत्र है और किसी को उपवास न करने के लिए नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने जरांगे पाटील के आंदोलन में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल यह सिर्फ अंदाजा है कि जरांगे पाटील मुंबई कब पहुंचेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो बातें बताई जा रही हैं, वे कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों से जुड़ी हैं, और सिर्फ अंदाजे के आधार पर वे आदेश नहीं दे सकते, फिलहाल सिर्फ नोटिस दी जा सकती है। कोर्ट ने कोई निरीक्षण या टिप्पणी करने से भी इनकार किया और कहा कि जरांगे पाटील एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं और आंदोलन करना उनका मूलभूत हक है।