मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:30 IST

निजी बैंकों का किसानों को ठेंगा

जिलाधीश ने सुधरने की दी नसीहत, प्रतिसाद नहीं देनेवाले बैंकों से खातें बंद करने की चेतावनी

निजी बैंकों का किसानों को ठेंगा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर.

सरकार के आदेश के बावजूद निजी बैंक किसानों को ठेंगा दिखा रहे है. फसल कर्ज देने में डीसीबी बैंक, फेडरल बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और साउथ इंडियन बैंक पूरीतरह फिसड्डी साबित हुई है. जिलाधीश कुमार आशीर्वाद ने इन बैंकों को सुधरने की नसीहत दी है. जो बैंक अपनी परफार्मंस में सुधार नहीं लाएंगे, उन बैंकों से खाते बंद करने की चेतावनी दी गई है. पिछले महीने तक इन बैंकों का फसल कर्ज वितरण ज़ीरो फीसदी था. जिले में सूखा घोषित होने के बाद किसानों को कई तरह की रियायतें दी जा रही है। फसल कर्ज भी इसमें शामिल है। राष्ट्रीयकृत बैंकों ने जहां अपेक्षा के अनुरुप फसल कर्ज बांटा, वहीं निजी बैंके फसल कर्ज वितरण में काफी पिछड़ गई है. जिलाधीश आशीर्वाद ने जिले के सभी बैंकों को किसानों के कर्ज के संबंध में तुरंत और सकारात्मक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है.

कर्नाटक बैंक 232 फीसदी व महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक 103 फीसदी खरीफ फसल कर्ज बांट चुका है, वहीं कुछ निजी बैंकों ने 0 से 5 फीसदी ही फसल कर्ज बांटा है. जिलाधीश ने ऐसे निजी बैंकों से खाते बंद करने व प्रतिसाद देनेवाली बैंकों में खाते खोलने की सूचना संबंधित एजेंसियों को दी है. जिलाधीश कुमार आशीर्वाद ने खरीफ सीजन में फसल कर्ज बांटने का प्रमाण बढ़ाने के निर्देश दिए है. जिले में खरीफ सीजन के लिए 1,500 करोड़ रुपये का टारगेट दिया गया था. अब तक 1066 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं, जो टारगेट का 71 परसेंट है. आईडीबीआई बैंक ने 32 फीसदी, एचडीएफसी बैंक ने 28 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक ने 27 फीसदी, एक्सिस बैंक ने 7 फीसदी, इंडसइंड बैंक ने 5 फीसदी, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 4 फीसदी और आरबीएल बैंक ने 4 फीसदी कर्ज बांटे हैं. इस महीने फिर एक बार फसल कर्ज वितरण की समीक्षा की जाएगी.

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