निधि रोकने की चेतावनी पर भाजपा नगरसेवकों ने 3 दिन में कराए 20-22 हजार मतदाता पंजीयन
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए भाजपा नगरसेवकों को मतदाता पंजीयन का लक्ष्य मिला था। जानकारी के अनुसार डीपीसी निधि रोकने की चेतावनी के बाद अंतिम तीन दिनों में काम तेज हुआ।
नागपुर विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए भाजपा ने अपने नगरसेवकों को ज्यादा से ज्यादा मतदाता पंजीयन का टारगेट दिया था। कुछ नगरसेवकों को छोड़ दें तो ज्यादातर ने इस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया। पार्टी ने सभी नगरसेवकों और पदाधिकारियों से कम से कम 100 मतदाताओं का पंजीयन कराने को कहा था, पर निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
जानकारी के अनुसार, जब आला नेताओं की तरफ से यह चेतावनी आई कि ऐसे नगरसेवकों के क्षेत्र के विकास के लिए डीपीसी की निधि नहीं दी जाएगी, तब सब अंतिम चरण में तेजी से काम पर लग गए। नतीजा यह रहा कि आखिरी 3 दिनों में ही नगरसेवकों की ओर से करीब 20 से 22 हजार स्नातक मतदाताओं का पंजीयन हुआ।
शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी ने कहा कि पार्टी की ओर से नागपुर शहर में अंतिम 3 दिनों में करीब 20 से 22 हजार मतदाताओं का पंजीयन कराया गया। उनके मुताबिक अब तक शहर में करीब 90,000 मतदाताओं का पंजीयन किया जा चुका है।
पिछले चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा से यह सीट छीन ली थी, जबकि इससे पहले यह सीट भाजपा के पास ही रहती आई थी। मतदाता पंजीयन न कराने की लापरवाही की वजह से तब हार का सामना करना पड़ा था। इसीलिए इस बार भाजपा ने सावधानी बरती और पंजीयन पर जोर दिया। दयाशंकर तिवारी की अगुवाई में पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस काम में जुटे। जनवरी में हुए महानगरपालिका चुनाव के बाद नगरसेवकों को भी मतदाता पंजीयन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। फिर भी नगरसेवकों ने पार्टी के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे पार्टी अपेक्षित आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी। आखिर में निधि रोकने की चेतावनी काम आई और सभी नगरसेवक सक्रिय हो गए।
जानकारी के अनुसार, स्थायी समिति अध्यक्ष शिवानी दाणी ने करीब 1,000 आवेदन पार्टी को सौंपे। विक्की कुकरेजा ने करीब 300 मतदाताओं का पंजीयन कराया। बताया जाता है कि 6 नगरसेवकों को छोड़कर बाकी सभी ने 50 से ज्यादा मतदाताओं का पंजीयन कराया है। कुछ नगरसेवकों ने 40 से 50 मतदाता पंजीकृत कराए, जबकि 6 नगरसेवक यह लक्ष्य भी हासिल नहीं कर सके।
अंतिम चरण में पंजीयन के दौरान भीड़ और अव्यवस्था होती है। इसे देखते हुए भाजपा ने पार्टी से बाहर के 100 लोगों की एक स्वतंत्र टीम तैनात की थी, जिनकी मदद से पंजीयन की प्रक्रिया में तेजी आई। बताया जाता है कि इस परीक्षा में असफल रहे नगरसेवकों को निधि दी जाए या नहीं, इसका फैसला संभवतः चुनाव के बाद लिया जाएगा।