नेरळ में नागरी समस्याओं को लेकर गोरख शेप का उपोषण, ग्रामीणों और राजकीय दलों का समर्थन बढ़ा
रायगड जिले की सबसे बड़ी नेरळ ग्रामपंचायत में पानी, सड़क, अतिक्रमण और घनकचरा प्रकल्प जैसे मुद्दों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता गोरख शेप उपोषण पर बैठे हैं।
रायगड जिले की सबसे बड़ी ग्रामपंचायत नेरळ में नागरी समस्याओं को लेकर सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता गोरख शेप ने उपोषण शुरू कर दिया है। गांव की समस्याओं को लेकर शुरू किए गए इस उपोषण को स्थानीय ग्रामवासियों, सामाजिक संगठनों और राजकीय पार्टियों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
गोरख शेप ने नेरळ गांव के छत्रपती शिवाजी महाराज चौक में अपना तय उपोषण शुरू किया। इस मौके पर शिवसेना शिंदे गुट, शिवसेना ठाकरे गुट और नेरळ व्यापारी संघटना के प्रतिनिधी मौजूद रहे। इसके बाद उपोषण स्थल पर जिला परिषद सदस्य सुनीता मोरे, पंचायत समिति सदस्य भगवान चंचे समेत सभी राजकीय दलों के नेता पहुंचे। शिवसेना शिंदे पार्टी के प्रभाकर देशमुख, ठाकरे पार्टी के बंडू क्षीरसागर, युवासेना के प्रथमेश मोरे, पूर्व सरपंच आयुब तांबोळी और मोहाची वाडी के ग्रामवासियों की भी वहां भारी भीड़ जमा हुई।
गोरख शेप ने नेरळ गांव की समस्याओं की जानकारी देते हुए कहा कि गांव में पानी नहीं है और कई जगहों पर पानी पहुंच ही नहीं पाता। दूसरी तरफ नागरीकरण बढ़ने की वजह से नेरळ, कोल्हारे और ममदापूर इन तीन ग्रामपंचायतों को नगरपरिषद बनाया जाए, यह मांग भी उठाई गई। उनके मुताबिक नेरळ गांव की आबादी करीब एक लाख के आसपास पहुंच चुकी है, लेकिन गांव में अग्निशमन यंत्रणा (फायर ब्रिगेड) ही नहीं है। फुटपाथ और सड़क खाली करने के लिए व्यापारी संकुल बनाया गया था, लेकिन वह व्यापारी संकुल आज तक खोला नहीं गया, जिस वजह से सड़क खाली नहीं हो पाई।
गांव में पानी की कमी न हो इसके लिए जलजीवन योजना लागू की गई, लेकिन 2024 से काम चल रहा होने के बावजूद काम की रफ्तार बहुत धीमी है। इसके बावजूद 40 फीसदी बिल अदा कर दिया गया है। यह बिल किस काम के लिए दिया गया, यह सवाल उपोषण के दौरान पूछा जाएगा।
नेरळ ग्रामपंचायत की सीमा में अतिक्रमण भी बढ़ा है, लेकिन ग्रामपंचायत के प्रशासन ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई है। बांधकाम विभाग के कल्याण कर्जत रोड पर नेरळ विद्या मंदिर से पेट्रोल पंप तक के हिस्से में सड़क किनारे का अतिक्रमण हटाया जाए, साथ ही इस सड़क पर मौजूद वन जमीन का मसला भी सुलझाया जाए, ये मुख्य मांगें रखी गई हैं।
नेरळ ग्रामपंचायत में दो करोड़ रुपये खर्च कर घनकचरा प्रकल्प बनाया गया था, लेकिन आज वहां लगी मशीनरी बंद पड़ी है। प्रकल्प की जगह से 600 से 700 मीटर दूरी पर कचरा फेंका जा रहा है। उपोषणकर्ता का आरोप है कि बाहर से भी कचरा लाकर वहां डाला जा रहा है और ग्रामपंचायत के भीतर के कचरे पर कोई प्रक्रिया नहीं हो रही।
घनकचरा प्रकल्प के लिए आरक्षित साढ़े पांच एकड़ जमीन में से दो एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है, लेकिन ग्रामपंचायत की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। इसलिए सभी कामों का सरकारी ऑडिट कराया जाए और वह ऑडिट ग्रामवासियों की मौजूदगी में हो, यह मांग भी रखी गई। साथ ही 15वें वित्त आयोग के तहत काम नहीं हुए, लेकिन बिल निकाल लिए गए हैं, ऐसा आरोप है। इस वजह से नल कनेक्शन और घरपट्टी (हाउस टैक्स) की जानकारी में भी फर्क नजर आ रहा है। पाणीपट्टी वसूली में गड़बड़ी होने की भी बात कहते हुए इसकी जांच कराने की मांग की गई है।