NCERT की नौवीं की सोशल साइंस में नया चैप्टर, बच्चे सीखेंगे बिजनेस और स्टार्टअप के गुर
NCERT ने नौवीं की सोशल साइंस में उद्यमिता का नया चैप्टर जोड़ा है, जिसमें बिजनेस प्लान, AI और भारतीय स्टार्टअप की कहानियां हैं।
स्कूल की किताबों में अब गणित, विज्ञान और इतिहास के साथ बिजनेस की दुनिया की बातें भी पढ़ाई जा रही हैं। पढ़ाई को ज्यादा व्यावहारिक बनाने के लिए NCERT ने नौवीं की सोशल साइंस के सिलेबस में एक नया चैप्टर जोड़ा है।
इस चैप्टर का मुख्य मकसद है कि बच्चों को छोटी उम्र में ही बिजनेस के बुनियादी नियम समझ आएं, उनमें जोखिम उठाने की क्षमता बने और स्टार्टअप में दिलचस्पी पैदा हो।
चैप्टर को सीधे और दिलचस्प ढंग से पेश किया गया है। इसमें बताया गया है कि उद्यमिता का समाज और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है। बिजनेस के मुख्य कार्यक्षेत्र कौन से हैं, यह भी समझाया गया है। साथ ही एक असरदार बिजनेस प्लान कैसे तैयार किया जाता है, इसका तरीका भी दिया गया है।
आज की तकनीक को भी इसमें जगह मिली है। स्कूली बच्चों को शुरुआती जानकारी दी जा रही है कि मार्केट एनालिसिस के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल कैसे हो सकता है।
चैप्टर में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की तेज बढ़त की भी जानकारी है। इसमें लिखा है कि एक दशक पहले देश में गिनती के स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी तादाद 2.3 लाख तक पहुंच गई है। यह भी बताया गया है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप देश बन गया है।
पढ़ाई को और दिलचस्प बनाने के लिए दो बड़े भारतीय ब्रांड का सफर भी जोड़ा गया है। पहला है लिज्जत पापड़। साल 1959 में मुंबई की 7 गृहिणियों ने सिर्फ 80 रुपये उधार लेकर यह काम शुरू किया था। मेहनत और अनुशासन के दम पर इस उद्योग ने आज दुनिया भर में अपनी जगह बनाई है।
दूसरी कहानी मोहन सिंह ओबेरॉय की है। पंजाब में जन्मे ओबेरॉय ने महीने के 50 रुपये की नौकरी से शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर पहला होटल खरीदा और आगे चलकर भारत की होटल इंडस्ट्री के दिग्गज बने।
उम्मीद जताई गई है कि NCERT का यह कदम बच्चों को आगे चलकर सिर्फ नौकरी ढूंढने वाला नहीं रहने देगा, बल्कि नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रेरित करेगा।