नवरात्र में व्रत रखने वाले इन गलतियों से बचें, जानें उपवास के खास नियम
शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दसरा पर खत्म होगा। व्रत रखने वालों के लिए सात्विक खानपान, संयम और कन्या पूजन के नियम।
पितृपक्ष खत्म होते ही सबको नवरात्री का इंतज़ार लग जाता है। देवी के नौ दिन, हर तरफ लाइटिंग, फूल और गरबा का माहौल रहता है। इस साल शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहा है और 20 अक्टूबर को खत्म होगा। इन नौ दिनों में लोग देवी के नौ रूपों की पूजा करते हैं और बहुत से लोग उपवास भी रखते हैं।
तारीखों और समय की बात करें तो प्रतिपदा 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगी। नवरात्री का पहला दिन रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को पड़ेगा। आखिरी दिन यानी दशहरा 20 अक्टूबर को है। 11 से 20 अक्टूबर तक के ये नौ दिन देवी के होंगे।
उपवास का मतलब सिर्फ खाना बंद कर देना नहीं है। इसके कुछ नियम हैं, और उन्हें निभाने पर ही उपवास का फल मिलता है। वरना यह बस भूखा रहने जैसा हो जाता है। लेख के मुताबिक उपवास का मतलब पेट को भूखा रखना नहीं, मन को शांत रखना है। बुरा बोलने और बुरा बर्ताव करने से बचना है। नौ दिन मन, बोली और बर्ताव, तीनों सात्विक रखने हैं। देवी को यही पसंद है।
पहली बात, दिन में सिर्फ एक बार फलाहार करें। कई लोग बार-बार खाते रहते हैं और कहते हैं कि उपवास है। ऐसा न करें। उपवास हो तो दिन में एक ही बार पेट भरकर फलाहार करें। बार-बार खाने से उपवास टूटा हुआ सा हो जाता है और उसका पुण्य भी कम होता है।
दूसरी बात, बुरी चीज़ों से दूर रहें। इन नौ दिनों में मटन, चिकन, मछली और अंडे पूरी तरह बंद रखें। सिगरेट, गुटखा और तंबाकू को बिल्कुल हाथ न लगाएं। बहुत तीखा और बहुत तेलिया खाना भी टालें। देवी के दिनों में यह सब वर्ज्य माना जाता है।
तीसरी बात, पानी बार-बार न पिएं। प्यास लगे तो पानी पिएं, लेकिन बार-बार पानी पीने से बचना चाहिए। कुछ लोग उपवास में लगातार पानी पीते रहते हैं, और कहा जाता है कि इससे भी व्रत हल्का पड़ता है। ज़रूरत हो तभी पानी लें।
चौथी बात, हो सके तो नंगे पैर रहें। पुराने लोग नवरात्री में चप्पल नहीं पहनते थे और नौ दिन नंगे पैर रहते थे। आजकल ऑफिस की वजह से सबके लिए यह मुमकिन नहीं, पर घर पर रहते हुए चप्पल के बिना रहने की कोशिश करें। इससे शरीर की नकारात्मक ऊर्जा निकल जाती है।
पांचवीं बात, हल्का और सात्विक खाएं। उपवास में साबूदाना खिचड़ी, वरई के चावल, फल, दूध और मूंगफली जैसी चीज़ें चलती हैं। बाहर का तला हुआ और पैकेट वाला खाना टालें। घर का बना सादा खाना सबसे अच्छा है।
अगर तबीयत बिगड़ जाए या किसी काम की वजह से उपवास पूरा न हो पाए, तो उसे आधा छोड़ न दें। देवी के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगें। मन से कहें, "माँ, मुझसे गलती हो गई, मुझे माफ कर दो", और उसके बाद ही उपवास खोलें।
सप्तमी, अष्टमी या नवमी को उपवास खोल रहे हों तो एक अहम विधि करनी पड़ती है, जिसे कन्या पूजन कहते हैं। नौ छोटी बच्चियों को घर बुलाएं। उनके पैर धोएं और उन्हें हल्दी-कुमकुम लगाएं। उन्हें पूरी, सब्ज़ी और हलवे का नैवेद्य खिलाएं और कोई छोटा सा तोहफा दें। ऐसा करने पर उपवास का पूरा फल मिलता है। माना जाता है कि बच्चियों में देवी का ही अंश होता है।
लेख के अंत में कहा गया है कि नवरात्र सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं, अपने मन को साफ करने का मौका है। नौ दिन भक्ति, अनुशासन और संयम रखा जाए तो देवी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।