नागपुर: स्कूल बस चालक रेड सिग्नल और रॉन्ग साइड चलाकर बच्चों की जान डाल रहे खतरे में
नागपुर की सड़कों पर स्कूल बसें रोज ट्रैफिक नियम तोड़ रही हैं, सिग्नल जंपिंग और रॉन्ग साइड ड्राइविंग से बच्चों की सुरक्षा दांव पर है।
नागपुर जिले में स्कूल बसें अब रोज ट्रैफिक नियम तोड़ने की मिसाल बन गई हैं। चौराहों पर रेड सिग्नल को नजरअंदाज कर तेजी से निकल जाना, बेधड़क रांग साइड चलाना और स्पीड लिमिट क्रॉस करके फर्राटा भरना, यह अब शहर की सड़कों पर हर दिन की बात हो गई है।
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जो बच्चे स्कूल में अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी सीखने जाते हैं, वही अपनी स्कूल बस में रोज ट्रैफिक नियम तोड़ने और गलत तरीके सीखने पर मजबूर हो जाते हैं।
बस या वैन में बैठते ही नियम तोड़ने का सिलसिला शुरू हो जाता है, क्योंकि लगभग सभी स्कूल बस और वैन चालक बिना सीट बेल्ट लगाए गाड़ी चलाते नजर आते हैं। समय पर स्कूल पहुंचने या ज्यादा ट्रिप लगाने की जल्दी में चालक रेड सिग्नल की परवाह किए बिना बस दौड़ाते हैं, और तय स्पीड लिमिट तोड़कर ओवरस्पीडिंग करना आम बात है।
ट्रैफिक जाम से बचने के बहाने ये चालक बेझिझक रांग साइड में गाड़ी चला देते हैं, जो सामने से आ रहे वाहनों के लिए ही नहीं बल्कि बस में बैठे बच्चों की जान के लिए भी खतरनाक है। इसके अलावा स्कूलों के बाहर और मेन रोड पर बसों को आड़ा-तिरछा खड़ा कर दिया जाता है, जिससे बाकी लोगों को भी भारी जाम झेलना पड़ता है। बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी जैसी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए, लेकिन ज्यादातर स्कूल बसों में या तो ये खराब पड़ी हैं या हैं ही नहीं।
बच्चे जब हर दिन अपनी आंखों के सामने अपने ही बस ड्राइवर को कानून तोड़ते, पुलिस को धता बताते और दूसरों की जान जोखिम में डालते देखते हैं, तो इसका उनके कोमल मन पर बहुत बुरा असर पड़ता है। रोज ऐसा नजारा देखने से बच्चों में यह धारणा बन जाती है कि समय बचाने या सुविधा के लिए नियम तोड़ना गलत नहीं है। बार-बार अचानक ब्रेक लगने, रांग साइड ड्राइविंग और तेज रफ्तार के चलते बच्चे सफर के दौरान डर और असुरक्षा में रहते हैं। जो स्कूल बच्चों को नैतिक शिक्षा और नागरिक जिम्मेदारी सिखाते हैं, उन्हीं का ट्रांसपोर्ट सिस्टम गैर-जिम्मेदार व्यवहार सिखाता है, जिससे बच्चों के लिए सही-गलत का फर्क धुंधला हो जाता है।
पुलिस और प्रशासन से मांग की गई है कि सिग्नल जंप, रांग साइड और ओवरस्पीडिंग करने वाले स्कूल बस चालकों पर सख्त चालान काटे जाएं, ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड हो और बस का परमिट रद्द किया जाए। अमेरिका और दुबई की तरह भारत में भी 'स्टॉप सिग्नल' नियम लागू करने की मांग है, जिसमें स्कूल बस रुकने पर पीछे आ रहे वाहनों को भी रुकना या स्पीड धीमी करनी होगी। यह भी कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन सिर्फ ठेकेदारों पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला नहीं झाड़ सकता, अगर किसी स्कूल की बस नियम तोड़ती पकड़ी जाए तो स्कूल प्रबंधन पर भी एक्शन होना चाहिए। सभी स्कूल बसों के जीपीएस और सीसीटीवी कैमरों को आरटीओ और नागपुर ट्रैफिक पुलिस के कंट्रोल रूम से जोड़ने की मांग भी उठी है ताकि रियल-टाइम निगरानी हो सके।
इसके अलावा बस चालकों के लिए हर 3 महीने में रोड सेफ्टी, ट्रैफिक रूल्स और चाइल्ड सेफ्टी पर वर्कशॉप कराने और उनकी चरित्र व मेडिकल फिटनेस की सख्त जांच करने की सलाह दी गई है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर सुबह 8 से 10 बजे और दोपहर 12 से 3 बजे के बीच स्कूल जोन में गश्त और औचक जांच करने की भी मांग है। साथ ही एक मोबाइल ऐप लॉन्च करने का सुझाव दिया गया है, जहां आम नागरिक या पैरेंट्स नियम तोड़ती स्कूल बस का फोटो या वीडियो बनाकर तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें, जिस पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई हो।