नागपुर में पुराना भंडारा रोड और जम्बूदीपनगर का नाला, दोनों काम सालों से अधर में
नागपुर शहर और जिले में पिछले सालों में हजारों करोड़ रुपयों के बड़े विकास कार्य हुए हैं। शहर के नितिन गडकरी केंद्रीय मंत्री और देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं, और इस दौरान सीमेंट की सड़कों और फ्लाईओवर का जाल सा बिछ गया है। कई काम चल रहे हैं और कई पाइपलाइन में हैं। इसके बावजूद दो छोटे प्रोजेक्ट अलग-अलग वजहों से अटके पड़े हैं।
इनमें पहला है मेयो हॉस्पिटल चौक से सुनील होटल चौक तक का सिर्फ 3 किमी लंबा पुराना भंडारा रोड। दूसरा है दक्षिण नागपुर के जम्बूदीपनगर के नाले का सौंदर्यीकरण। बताया गया है कि इन दोनों कामों के लिए निधि की कोई कमी नहीं है।
पुराने भंडारा रोड का काम करीब 27 साल से लटका हुआ है। कुछ प्रभावितों ने अदालत जाकर इसे रुकवा दिया है। मध्य नागपुर विकास आघाड़ी के भूषण दड़वे ने इस रोड को जल्दी बनवाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। साल 2017 में हाई कोर्ट ने इसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिया था, और उसे भी अब 9 साल हो चुके हैं।
करीब 1 साल पहले इस रोड के सीमेंटीकरण और चौड़ाईकरण का काम शुरू हुआ था। लेकिन मुआवजे को लेकर कुछ प्रभावितों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जब तक यह मामला निपट नहीं जाता, काम अटका रहेगा। मांग उठ रही है कि जिन प्रॉपर्टी धारकों ने मुआवजा ले लिया है, उनकी प्रॉपर्टी के रुकावट वाले हिस्से तोड़कर सड़क चौड़ी की जाए। पर अधिकारी इसमें गंभीरता नहीं दिखा रहे।
दड़वे का कहना है कि प्रभावितों का अदालत जाना उनका अधिकार है। लेकिन जनहित में मामले को जल्द निपटाना दूसरे पक्ष के लिए भी जरूरी है, और यह दूसरा पक्ष मनपा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान मनपा के वकील पहुंचते ही नहीं, और पहुंचते हैं तो कोई न कोई कारण बताकर अगली तारीख मांग लेते हैं। उनके मुताबिक अब रोड 'तारीख' पर ही लटक गया है। दड़वे ने बताया कि 30 सितंबर को, यानी आज, सुनवाई की तारीख है। उनका कहना है कि मनपा को अपने वकील के जरिए अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए ताकि अदालत फैसला दे सके, और टाइमपास का खेल खेलकर प्रोजेक्ट को लंबा नहीं खींचना चाहिए।
दूसरी तरफ दक्षिण नागपुर का जम्बूदीपनगर का नाला बारिश में नागरिकों के लिए परेशानी बन जाता है। कुछ हिस्सों में नाला ओवरफ्लो होता है और सैकड़ों लोगों के घरों में पानी घुस जाता है। जुलाई 2024 की बारिश में इस नाले ने कहर बरपाया था। तब के मनपा आयुक्त अभिजीत चौधरी और क्षेत्र के विधायक मोहन मते ने नाले का निरीक्षण किया था। आयुक्त ने नाले की सफाई और गहराई बढ़ाने जैसे निर्देश दिए थे।
इससे पहले तत्कालीन विधायक सुधाकर कोहले के कार्यकाल में नाले को गहरा करने और ऊपर स्लैब डालने के लिए 13 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। महालक्ष्मीनगर-2 के हिस्से में नाले की दिशा बदलने और स्लैब डालने का काम ही हो पाया। उसके बाद अयोध्यानगर से जम्बूदीपनगर की दिशा में अंबिकानगर लाडीकर लेआउट के कुछ हिस्सों में गहरीकरण और स्लैब का काम किया गया।
जम्बूदीपनगर नाले के कुछ हिस्सों में स्लैब डालने का काम किसी तकनीकी कारण से अटका बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार रिंग रोड के पास यह नाला एक निजी प्लॉट से गुजरता है और उसका मालिक अपनी जमीन नहीं दे रहा। जबरदस्ती करने पर वह अदालत जा सकता है। नागरिकों का कहना है कि जिन हिस्सों में स्लैब नहीं डला, वहां कोई तकनीकी अड़चन नहीं है, फिर वहां काम क्यों नहीं हो रहा। वे स्लैब की मांग करते-करते थक चुके हैं। क्षेत्र के नगरसेवकों और विधायक को कई बार निवेदन दिया जा चुका है। गर्मी के दिनों में नाले से उठती बदबू, कीड़े-मच्छर और सांप भी लोगों को परेशान करते हैं।