नागपुर की सोलर डिफेंस ने सेना को सौंपे 450 नागास्त्र 1R कामिकेज़ ड्रोन
नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने एक ही खेप में 450 नागास्त्र 1R लॉइटरिंग म्यूनिशन सेना को सौंपे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर की कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने मंगलवार को बताया कि उसने भारतीय सेना को एक ही खेप में 450 नागास्त्र 1R कामिकेज़ ड्रोन आधारित लॉइटरिंग म्यूनिशन सौंप दिए हैं। कंपनी का दावा है कि किसी भी निर्माता की तरफ से दी गई यह अब तक की सबसे बड़ी खेप है। इसे सेना की स्वदेशी सटीक हमले की क्षमता को मज़बूत करने वाला कदम बताया गया है।
नागास्त्र 1R को सेना की कम दूरी के हमले की ज़रूरतों के हिसाब से खास तौर पर तैयार किया गया है। इसे 5 किलोमीटर की रेंज में निशाना ढूंढने और उस पर वार करने के लिए बनाया गया है। इसमें 1 किलो का वारहेड लगा है। यह सिस्टम इंसानों और हल्की सुरक्षा वाली गाड़ियों, यानी सॉफ्ट-स्किन टारगेट, पर हमले के लिए है।
ड्रोन में दिन और रात में काम करने वाले सर्विलांस कैमरे हैं और GPS से चलने वाला नेविगेशन है। दावा है कि इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) सिर्फ 2 मीटर है। रात में हमला करने की क्षमता की वजह से यह कम रोशनी में भी काम कर सकता है।
नागास्त्र सीरीज़ की एक खासियत इसकी कम आवाज़ है। SDAL के मुताबिक कम शोर की वजह से नागास्त्र 1R 200 मीटर से ज़्यादा की ऊंचाई पर पकड़ में नहीं आता। इसमें एबॉर्ट-एंड-रिटर्न की सुविधा भी है। अगर निशाने की पहचान न हो पाए तो ड्रोन हमला छोड़कर अपने कंट्रोल स्टेशन पर लौट सकता है।
सेना ने यह ऑर्डर इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत दिया, और इससे पहले सख्त जांच प्रक्रिया हुई। पिछले साल मार्च में हिमाचल प्रदेश के बकलोह में स्पेशल फोर्सेज़ ट्रेनिंग स्कूल (SFTS) में तकनीकी ट्रायल हुए, जिनमें चार कंपनियों ने हिस्सा लिया। इसके बाद सिस्टम की कार्यक्षमता और निशाने पर सटीक वार को परखने के लिए कई लाइव ट्रायल किए गए।
सूत्रों के मुताबिक नागास्त्र 1R को कम दूरी के लिए बनाया गया है, लेकिन पूरा नागास्त्र सिस्टम 10 किलोमीटर तक की दूरी पर निशाना लगा सकता है और 40 मिनट तक हवा में रह सकता है। यह तय ज़रूरत से दोगुना है। स्वतंत्र सूत्रों ने इसकी स्वायत्त ऑपरेटिंग रेंज 15 किलोमीटर तक बताई है।
इतनी क्षमता के बावजूद इसे आसानी से ले जाने लायक बनाया गया है। ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन, कम्युनिकेशन कंट्रोल इक्विपमेंट और न्यूमैटिक लॉन्चर मिलाकर इसका कुल वज़न करीब 30 किलो है, इसलिए फील्ड में जवान इसे तैनात कर सकते हैं।
सोलर ग्रुप के चेयरपर्सन सत्यनारायण नुवाल ने कहा कि नागास्त्र 1R में 80 प्रतिशत से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री है। इसे बेंगलुरु की Z Motion Autonomous Systems Private Limited के साथ मिलकर बनाया गया है। यह देश में रक्षा निर्माण को मज़बूत करने और आयातित तकनीक पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक और कदम है। कंपनी सिस्टम में लगने वाली मोटरों को भी स्वदेशी बनाने पर काम कर रही है।
SDAL मानवरहित सटीक हमले वाले सिस्टम का दायरा बढ़ा रही है। कंपनी कालास्त्र सीरीज़ के लंबी दूरी के ड्रोन बना रही है, जो 50 किलो तक के वारहेड ले जा सकेंगे। वह कैनिस्टर लॉन्च्ड एंटी-आर्मर लॉइटरिंग म्यूनिशन (CALM) के सर्दियों में होने वाले ट्रायल की तैयारी भी कर रही है। यह ट्यूब से दागा जाने वाला हथियार है, जो मैकेनाइज़्ड इन्फैंट्री की इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल पर लगाने के लिए है।
इस ताज़ा डिलीवरी से रक्षा निर्माण में नागपुर की बढ़ती भूमिका दिखती है, क्योंकि देश की कंपनियां सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी तकनीक का उत्पादन बढ़ा रही हैं।