मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:27 IST

नागपुर हॉकी मैदान का भाडेपट्टा रद्द, VHA की अपील अपर विभागीय आयुक्त ने खारिज की

अमरावती रोड के हॉकी मैदान के मामले में विदर्भ हॉकी असोसिएशन की अपील खारिज, जिलाधिकारी का आदेश कायम।

नागपुर हॉकी मैदान का भाडेपट्टा रद्द, VHA की अपील अपर विभागीय आयुक्त ने खारिज की
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमरावती रोड पर बने हॉकी मैदान के मामले में विदर्भ हॉकी असोसिएशन (VHA) को एक बार फिर झटका लगा है। अपर विभागीय आयुक्त, नागपुर विभाग ने महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता 1966 की धारा 247 के तहत VHA की दाखिल की हुई अपील खारिज कर दी है और जिलाधिकारी का आदेश कायम रखा है। जिलाधिकारी के उस आदेश में सरकारी नझूल जमीन का भाडेपट्टा रद्द करके जमीन शासन के कब्जे में लेने का निर्देश दिया गया था।

यह आदेश 28 सितंबर को जारी हुआ। इससे 3.80 हेक्टेयर जमीन के बारे में VHA की अपील फिलहाल खारिज हो गई है। यह सरकारी नझूल जमीन अमरावती रोड पर मौजा गाडगा, तहसील और जिला नागपुर में है। इसका खसरा क्रमांक 65/5 और नगर भूमापन क्रमांक 277 है। जमीन हॉकी के विकास और सार्वजनिक खेल सुविधाएं खड़ी करने के मकसद से VHA को भाडेपट्टे पर दी गई थी।

रिकॉर्ड के मुताबिक यह भाडेपट्टा 1962 से चला आ रहा है। 24 सितंबर 2007 को नवीनीकरण का करार हुआ, जिससे इसे 23 सितंबर 2037 तक बढ़ाया गया था। करार में लिखा है कि नवीनीकरण के बाद भी मूल भाडेपट्टे की शर्तें लागू रहेंगी।

जिलाधिकारी दफ्तर की नझूल शाखा ने मैदान की हालत के बारे में रिपोर्ट मंगवाई थी। जिला क्रीडा अधिकारी ने 15 जून को पाहणी रिपोर्ट दी, जिसमें मैदान की हालत पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं।

रिपोर्ट के मुताबिक मैदान की देखभाल संतोषजनक नहीं है और जगह-जगह मिट्टी, पत्थर और कम घास मिली। हॉकी के लिए जरूरी समतल पिच नहीं थी। प्राकृतिक या कृत्रिम टर्फ की सुविधा भी नहीं थी। मैदान के किनारे झाड़ियां, बढ़ी हुई वनस्पति और गंदगी मिली।

खुले नाले और टूटे स्लैब होने से खिलाड़ियों को चोट लगने की आशंका जताई गई। दर्शकों के लिए बैठने की व्यवस्था पुरानी और नाकाफी थी। गोलपोस्ट, मैदान की मार्किंग, ड्रेनेज, चेंजिंग रूम, शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होने की बात भी लिखी गई। रिपोर्ट का निष्कर्ष था कि मैदान की नियमित और अच्छे दर्जे की देखभाल नहीं हो रही।

अपर विभागीय आयुक्त ने जिलाधिकारी का आदेश, पाहणी रिपोर्ट, भाडेपट्टा करार, VHA का जवाब और अदालती कार्यवाही, सबको मिलाकर देखा। इसके बाद वे जिलाधिकारी के निष्कर्षों से सहमत हुए। आदेश में साफ कहा गया कि सिर्फ संस्था के रजिस्टर्ड होने से उसे सरकारी नझूल जमीन के भाडेपट्टे की अलग शर्तें मानने से छूट नहीं मिल जाती।

अपर आयुक्त ने यह भी कहा कि मामला अदालत में होने के बावजूद नझूल जमीन के भाडेपट्टे की शर्तें निभाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। आदेश में लिखा है कि कारण बताओ नोटिस देकर VHA को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, इसलिए नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हुआ।

इस मामले में 7 अगस्त, 2 सितंबर और 23 सितंबर को सुनवाई हुई। 23 सितंबर को मामला फैसले के लिए रखा गया। उसके बाद अपर विभागीय आयुक्त तुषार मठकर ने 28 सितंबर को आदेश जारी किया।

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