मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

मुंबई गोवा हाईवे: कशेडी से लोटे तक 9 महीने में 40 हादसे, 12 की मौत

कशेडी घाट से लोटे के बीच करीब 30 किलोमीटर का हिस्सा हादसों का गढ़ बन गया है, चार खतरनाक जगहों पर अब तक कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं हुआ।

मुंबई गोवा हाईवे: कशेडी से लोटे तक 9 महीने में 40 हादसे, 12 की मौत
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई-गोवा हाईवे को करोड़ों रुपये खर्च करके फोर लेन बनाया गया था, ताकि सफर तेज और आरामदायक हो सके। लेकिन कशेडी घाट से लोटे तक का करीब 30 किलोमीटर का हिस्सा अब वाहन चालकों के लिए मौत का जाल बन चुका है। महज नौ महीनों में इस रास्ते पर 40 हादसे दर्ज हुए हैं, जिनमें 12 लोगों की जान जा चुकी है और 30 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे लोगों में गुस्सा है।

इस रूट पर कशेडी टनल, खवटी मोड़, जगबुडी पुल और लोटे फाटा, ये चार जगहें सबसे खतरनाक मानी जा रही हैं। यहां जरूरी सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी साफ दिखती है। लगातार हादसे होने के बावजूद ये चारों 'ब्लैक स्पॉट' सिर्फ कागजों पर ही ब्लैक स्पॉट बनकर रह गए हैं, ऐसा सवाल अब उठने लगा है।

कशेडी टनल से यातायात भले तेज हो गया हो, लेकिन बारिश के मौसम में टनल के अंदर पानी बहना, सीपेज होना और सड़क का फिसलन भरा हो जाना बड़ा खतरा बन जाता है। लाइटिंग और फिसलन रोकने के उपाय नाकाफी होने से खासकर दोपहिया चालकों के लिए यह रास्ता बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा है। कुछ दिन पहले ही यह बात सामने आई थी कि टनल की ज्यादातर लाइटें बंद पड़ी थीं।

खवटी में रेलवे पुल के पास वाला तीखा मोड़ भी हादसों की वजह बन गया है। यहां जरूरी दिशा-निर्देशक बोर्ड, ब्लिंकर और दूसरे सावधानी वाले उपाय न होने से चालकों को अचानक आने वाले मोड़ का अंदाजा ही नहीं लग पाता। नतीजा यह है कि यहां हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा।

जुलाई और अगस्त में जगबुडी पुल पर बेकाबू होकर भारी कंटेनर सीधे नदी में जा गिरे थे। इन घटनाओं के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन सबक लेगा, लेकिन खतरनाक जगहों पर मजबूत क्रैश बैरियर लगाने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। क्या प्रशासन किसी बड़े जानलेवा हादसे के होने का ही इंतजार कर रहा है, यह सवाल लोग पूछ रहे हैं।

गणेशोत्सव हो, दिवाली हो, शिमगा हो या फिर कोंकण के लोगों की रोजाना की आवाजाही, इस हाईवे पर सफर का खून से रंगना अब बंद होना चाहिए। नौ महीने में 12 लोगों की मौत और 30 से ज्यादा घायलों के आंकड़े प्रशासन के लिए खतरे की घंटी हैं।

इसी वजह से मांग उठ रही है कि कशेडी से लोटे तक के पूरे हिस्से का तुरंत सेफ्टी ऑडिट कराया जाए और सभी ब्लैक स्पॉट पर वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षा उपाय, क्रैश बैरियर, दिशा-निर्देशक बोर्ड, ब्लिंकर, पर्याप्त लाइटिंग और फिसलन रोकने के इंतजाम फौरन किए जाएं। अब सिर्फ मुआयने, बैठकें और भरोसे के वादे नहीं चाहिए। लोगों की जान बचाने के लिए असली काम कब शुरू होगा, इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए।

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