MPSC भर्ती में पदों की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ेगी, मुख्यमंत्री फडणवीस का ऐलान
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने MPSC की आने वाली भर्तियों में पदों की संख्या बड़े पैमाने पर बढ़ाने का ऐलान किया है, साथ ही परीक्षा पैटर्न बदलने की मांग पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवक-युवतियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी MPSC की आने वाली परीक्षाओं में पदों की संख्या बड़े पैमाने पर बढ़ाई जाएगी। यह ऐलान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया है। इतना ही नहीं, पिछले कई दिनों से परीक्षा पद्धति में बदलाव की मांग कर रहे स्टूडेंट्स की डिमांड पर भी सरकार बेहद गंभीरता से विचार कर रही है।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया कि युवाओं को रोजगार देने के मामले में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल की इस बैठक में पांच अलग-अलग विभागों ने अपने यहां खाली पड़े पदों को लेकर विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया। आने वाली भर्ती में खासकर गट-क कैटेगरी के क्लर्क-टायपिस्ट, टैक्स असिस्टेंट और असिस्टेंट मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर यानी AMVI जैसे अहम पदों की संख्या में बड़ा इजाफा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने पूरे भरोसे के साथ कहा कि आने वाली भर्ती प्रक्रिया में इतनी बड़ी तादाद में पद लाए जाएंगे कि MPSC के इतिहास के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि लोकल सेल्फ गवर्नमेंट बॉडीज यानी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में खाली पड़े पदों को भरने के लिए भी एक अलग और मजबूत व्यवस्था बनाने पर विचार चल रहा है।
दूसरी तरफ, राज्यसेवा, कृषि, इंजीनियरिंग और FSO जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स लगातार मांग कर रहे हैं कि वर्णनात्मक यानी डिस्क्रिप्टिव पैटर्न हटाकर पुराना वस्तुनिष्ठ यानी ऑब्जेक्टिव या MCQ पैटर्न फिर से लागू किया जाए। इस पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने साफ किया कि आयोग के कामकाज और परीक्षा पद्धति में सुधार के लिए सीनियर अफसर वी. राधा की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है।
इससे पहले दलवी कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक डिस्क्रिप्टिव पैटर्न लागू किया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि अगर वी. राधा कमेटी दोबारा ऑब्जेक्टिव यानी MCQ पैटर्न लागू करने की सिफारिश करती है, तो सरकार उसे खुले दिल से मानने को तैयार है।
वी. राधा कमेटी को अब तक 20,000 से ज्यादा ई-मेल और सुझाव मिल चुके हैं। स्टूडेंट्स की मुख्य मांग है कि आंसर शीट की जांच में पूरी पारदर्शिता रहे और हर साल परीक्षा व रिजल्ट का एक तय कैलेंडर पहले से जारी किया जाए। यह कमेटी सिर्फ परीक्षा पैटर्न तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रश्नपत्रों के सुरक्षित वितरण, परीक्षा की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP, मार्क्स देने की पद्धति और अचानक परीक्षा रद्द होने की स्थिति में चुने गए उम्मीदवारों के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर भी ठोस नियम बना रही है।