मीरा-भाईंदर को जैनों की नगरी कहने पर मनसे के सचिन पोपळे ने नरेंद्र मेहता को घेरा
भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के बयान पर मनसे विधानसभा अध्यक्ष सचिन पोपळे ने आपत्ति जताई है।
मीरा-भाईंदर जैनों की नगरी है, भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के इस दावे से शहर का राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। मेहता ने यह बात ठाणे में हुए 'दर्शन सागर सन्मान 2026' समारोह में कही थी। उनके इस बयान पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी मनसे ने कड़ा रुख अपनाया है। मनसे के विधानसभा अध्यक्ष सचिन वसंत पोपळे ने मेहता की जोरदार आलोचना की है।
ठाणे के कार्यक्रम में बोलते हुए नरेंद्र मेहता ने दावा किया कि जैन समाज की धार्मिक प्रथाओं को लेकर राजनीति करने की कोशिश हुई। उन्होंने बताया कि मीरा-भाईंदर में भी इसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उन्होंने उसे नाकाम कर दिया। मेहता ने कहा, "मेरा जन्म जैन धर्म में हुआ, इसका मुझे गर्व है। जैन धर्म पर जब-जब मुश्किल आएगी, तब-तब मैं उनके साथ खड़ा रहूंगा।"
मीरा-भाईंदर को जैनों की नगरी बताते हुए मेहता ने यह भी कहा कि यहां के विधायक और महापौर, दोनों जैन हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि मीरा-भाईंदर में प्रस्तावित 50 करोड़ रुपये के कत्लखाने का नक्शा महानगरपालिका में सत्ता आने के बाद उन्होंने नामंजूर कर दिया था।
मेहता के इस बयान पर मनसे के विधानसभा अध्यक्ष सचिन पोपळे ने आपत्ति ली है। पोपळे ने कहा, "मीरा-भाईंदर शहर जैनों की नगरी नहीं, बल्कि आगरी-कोळी और मराठी लोगों का शहर है।" उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि मेहता के बयान से मराठी-अमराठी, गुजराती और जैन समाज के बीच विवाद पैदा करने का काम हो रहा है।
पोपळे ने कहा कि शहर की पहचान किसी एक समाज तक सीमित नहीं की जा सकती। इसी बात को रखते हुए उन्होंने मेहता को चेतावनी दी। साथ ही उन्होंने अपील की कि धार्मिक या भाषाई आधार पर शहर में फूट डालने वाले बयानों से बचा जाए।
इस बीच, मेहता के बयान को लेकर भाजपा और मनसे के बीच फिर राजनीतिक टकराव होने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर मीरा-भाईंदर का राजनीतिक माहौल और गरमाने के आसार हैं।